Translate

गुरुवार, जुलाई 5

व्योम की आस



बन गया हूँ व्योम विशाल
घटाएँ बन के अब बरसो
पगली बन के आँचल सी
मन मंदिर से तुम लिपटो
मादक तुम हो या कि
ये मुरली है जान न पाये
ये जहाँ मधुर सुरों में यूँ बहको

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरा परिचय

n t s o o S e p d 3 9   Shared with On मेरा नाम महेश सोनी है। गुजराती माध्यम में कक्षा 11 तक शिक्षा प्राप्त की है। जडतर ज्वैलरी का कलाकार था...