कल्पना-लोक
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
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गुरुवार, जून 4
मेरा परिचय
मंगलवार, मई 19
संगीत से रोगोपचार
MUSIC FOR HEALTH
संगीत द्वारा बहुतसी बीमारियों का उपचार सभंव, चिकित्सा विज्ञान मानता हैं कि प्रतिदिन २० मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनने से बहुत रोगों से बचा जा सकता है। रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं,उसी प्रकार संगीत के सुरो व रागो का संबंध भी किसी ना किसी ग्रह से होता हैं। जातक को जिस ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग, सुर अथवा गीत सुनाये जायें तो जातक शीघ्र स्वस्थ होता हैं| जिन शास्त्रीय रागों का उल्लेख किया है उन रागों मे कोई भी गीत, भजन या वाद्य यंत्र बजाया या सुना जा सकता हैं। (सुर व राग से संबन्धित फिल्मी गीत उदाहरण के लिए)
ध्रुव वैद्य
1. हृदय रोग (cardiac care)
राग दरबारी व राग सारंग से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक है। इनसे संबन्धित गीत हैं :-
* तोरा मन दर्पण कहलाए (काजल),
* राधिके तूने बंसरी चुराई (बेटी बेटे ),
* झनक झनक तोरी बाजे पायलिया ( मेरे हुज़ूर ),
* बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम (साजन),
* जादूगर सइयां छोड़ मोरी (फाल्गुन),
* ओ दुनिया के रखवाले (बैजू बावरा ),
* मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये (मुगले आजम )
2. अनिद्रा (insomania)
राग भैरवी व राग सोहनी सुनना लाभकारी होता है, जिनके प्रमुख गीत हैं :-
* रात भर उनकी याद आती रही (गमन),
* नाचे मन मोरा (कोहिनूर),
* मीठे बोल बोले बोले पायलिया (सितारा),
* तू गंगा की मौज मैं यमुना (बैजु बावरा),
* ऋतु बसंत आई पवन (झनक झनक पायल बाजे),
* सावरे सावरे (अनुराधा),
* चिंगारी कोई भड़के (अमर प्रेम),
* छम छम बजे रे पायलिया (घूँघट ),
* झूमती चली हवा (संगीत सम्राट तानसेन ),
* कुहू कुहू बोले कोयलिया (सुवर्ण सुंदरी )
3. एसिडिटी (acidity)
होने पर राग खमाज सुनने से लाभ मिलता है | इस राग के प्रमुख गीत हैं :-
* ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार (संगीत),
* आयो कहाँ से घनश्याम (बुड्ढा मिल गया),
* छूकर मेरे मन को (याराना),
* कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया (अनुराधा),
* तकदीर का फसाना गाकर किसे सुनाये ( सेहरा ),
* रहते थे कभी जिनके दिल मे (ममता ),
* हमने तुमसे प्यार किया हैं इतना (दूल्हा दुल्हन ),
* तुम कमसिन हो नादां हो (आई मिलन की बेला)
4. दुर्बलता (weakness)
यह शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित है| व्यक्ति कुछ कर पाने मे स्वयं को असमर्थ अनुभव करता है। इस में राग जयजयवंती सुनना या गाना लाभदायक है। इस राग के प्रमुख गीत हैं :-
* मनमोहना बड़े झूठे (सीमा),
* बैरन नींद ना आए (चाचा ज़िंदाबाद),
* मोहब्बत की राहों मे चलना संभलके (उड़न खटोला ),
* साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं (चन्द्रगुप्त ),
* ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती हैं (दिल दिया दर्द लिया ),
* तुम्हें जो भी देख लेगा किसी का ना (बीस साल बाद )
5. स्मरण (memory loss)
जिनका स्मरण क्षीण हो रहा हो, उन्हे राग शिवरंजनी सुनने से लाभ मिलता है | इस राग के प्रमुख गीत है -
* ना किसी की आँख का नूर हूँ (लालकिला),
* मेरे नैना (मेहेबूबा),
* दिल के झरोखे मे तुझको (ब्रह्मचारी),
* ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम (संगम ),
* जीता था जिसके (दिलवाले),
* जाने कहाँ गए वो दिन (मेरा नाम जोकर )
6. रक्त की कमी (animia)
होने पर व्यक्ति का मुख निस्तेज व सूखा सा रहता है। स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन होता है। ऐसे में राग पीलू से संबन्धित गीत सुनें :-
* आज सोचा तो आँसू भर आए (हँसते जख्म), * नदिया किनारे (अभिमान),
* खाली हाथ शाम आई है (इजाजत),
* तेरे बिन सूने नयन हमारे (लता रफी),
* मैंने रंग ली आज चुनरिया (दुल्हन एक रात की),
* मोरे सैयाजी उतरेंगे पार (उड़न खटोला),
7. मनोरोग अथवा अवसाद (psycho or depression)
राग बिहाग व राग मधुवंती सुनना लाभदायक है। इन रागों के प्रमुख गीत है :-
* तुझे देने को मेरे पास कुछ नही (कुदरत नई), * तेरे प्यार मे दिलदार (मेरे महबूब),
* पिया बावरी (खूबसूरत पुरानी),
* दिल जो ना कह सका (भीगी रात),
* तुम तो प्यार हो (सेहरा),
* मेरे सुर और तेरे गीत (गूंज उठी शहनाई ),
* मतवारी नार ठुमक ठुमक चली जाये मोहे (आम्रपाली),
* सखी रे मेरा तन उलझे मन डोले (चित्रलेखा)
8. रक्तचाप (blood pressure)
ऊंचे रक्तचाप मे धीमी गति और निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता है। शास्त्रीय रागों मे राग भूपाली को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता है। -----ऊंचे रक्तचाप मे (high BP)
* चल उडजा रे पंछी कि अब ये देश (भाभी),
* ज्योति कलश छलके (भाभी की चूड़ियाँ ),
* चलो दिलदार चलो (पाकीजा ),
* नीले गगन के तले (हमराज़)
-----निम्न रक्तचाप मे (low BP)
* ओ नींद ना मुझको आए (पोस्ट बॉक्स न. 909),
* बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना (जिस देश मे गंगा बहती हैं ),
* जहां डाल डाल पर ( सिकंदरे आजम ),
* पंख होते तो उड़ आती रे (सेहरा )
9. अस्थमा (asthma)
आस्था तथा भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ राग मालकँस व राग ललित से संबन्धित गीत सुने जा सकते हैं। जिनमें प्रमुख गीत :-
* तू छुपी हैं कहाँ (नवरंग),
* तू है मेरा प्रेम देवता (कल्पना),
* एक शहँशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल (लीडर),
* मन तड़पत हरी दर्शन को आज (बैजू बावरा ), आधा है चंद्रमा ( नवरंग )
10. शिरोवेदना (headache)
राग भैरव सुनना लाभदायक होता है। इस राग के प्रमुख गीत :-
* मोहे भूल गए सावरियाँ (बैजू बावरा),
* राम तेरी गंगा मैली (शीर्षक),
* पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई (तेरी सूरत मेरी आँखें),
* सोलह बरस की बाली उमर को सलाम (एक दूजे के लिए)
रविवार, अप्रैल 26
स्वस्थ जीवन के सूत्र(अनुदित)
(बुजुर्गों के लिये)
अनुवादक - कुमार अहमदाबादी
डॉ. हिदेकी वाडा 61 वर्ष के हैं, वैज्ञानिक हैं। ये विशेष रुप से वृद्धों के मानसिक रोगों के विशेषज्ञ हैं। इन्हों ने अभी “द 80-यर ओल्ड वॉल” नाम का पुस्तक प्रकाशित किया है। किताब की अब तक 500,000 कॉपियां बिक चुकी है। आशा है 1 मिलियन तक बिक जाएगी।
डॉ.वाडा के 44 जीवन मंत्र यहां लिखए हैं। जो पढ़ने और साझा(शेयर) करने लायक हैं: विशेष रुप से आप के प्रिय वृद्धजनों के साथ:
1. प्रति दिन चलिये, धीमी गति से ही सही पर चलिये
2.जब आप दुःखी हों या गुस्से में हों तब गहरा श्वास लिजीए। इस से मन को शांति मिलेगी।
3. हल्का फुल्का व्यायाम कीजिए उस से शरीर कठोर बनेगा।
4. गर्मियों में अगर एयरकंडीशनर का उपयोग करते हों तो उचित मात्रा में पानी पीजिए।
5. आवश्यक हो तो डायपर पहनने में शरम मत कीजिएगा। वो शरीर के हलन चलन(बोडी मूवमेंट) को सरल बनाता है।
6. भोजन को अच्छी तरह चबाइये। इस से भोजन पचने में सरल होगा एवं मस्तिष्क व तन को सक्रिय रखेगा।
7.भूलने की आदत उम्र के कारण होती, बल्कि मस्तिष्क के कम उपयोग के कारण होती है।
8. ये आवश्यक नहीं है।प्रत्येक समस्या का उपचार दवाओं से नहीं हो।
9. रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और मधुमेह(सुगर) को जबरन कम करने की जरुरत नहीं है।
10. अकेला होना एकलता नहीं होती। वो आराम का समय हो सकता है।
11.थकान लगी हो तो शरीर में आलस फैलना स्वाभाविक है।
12.सुरक्षित तरीके से वाहन न चला सको तो वाहन चलाना छोड़ दो।
13.चाहे जो कीजिए, मंगल वो न कीजिए जिस से तनाव उत्पन्न हो। उसे टालिये
14. आयु बढने के बावजूद कुदरती इच्छाएं रहती है।
15. घर पर बैठे मत रहिये। तरोताजा हवा के संपर्क में रहिये, बाहर की दुनिया देखिये।
16. जिस की इच्छा हो वो खाइये। लेकिन मर्यादित मात्रा में खाइये।
17. प्रत्येक कार्य बिना कोई जल्दबाजी सावधानी पूर्वक कीजिए।
18.जो लोग आप को अस्वस्थ करते हैं। उन से दूर रहिये।
19.टीवी न मोबाइल को कम समय दीजिए।
20.कभी बीमारी से साथ समझौता कर लेना अच्छा होता है।
21.“हमेशा रास्ता होता है” – ये विचार व्यक्ति में शक्ति व उर्जा का संचार करता है।
22.ताजे फळ व सब्ज़ियां खानी जरुरी है
23.ज्यादा देर नहाना जरुरी नहीं है। नहाने के लिये १० मिनिट काफी हैं।
24.नींद न आये तो जबरदस्ती मत लीजिए।
25.जो आप को खुश करता हो वो मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।
26.मन में कुछ भी मत रखिये, जो कहना हो कर दीजिए।
27.विश्वास पात्र फैमिली डॉक्टर के संपर्क में रहिये।
28.हमेशा समर्पण करने की जरुरत नहीं। कभी “खराब माता पिता” बनना भी जरुरी है।
29.विचार बदलते हों, परिवर्तित होते हों तो फिक्र की कोई बात नहीं।
30.वृद्धावस्था में डिमेन्शिया (भूलने की आदत) कभी कभी शांति मिलने या प्राप्त करने का जरिया बन जाती है।
31.सीखना बंद करोगे तो तेजी से वृद्ध बनोगे।
32.मान सम्मान के पीछे दौड़ने की कोई जरुरत नहीं है। जो मिला हो उसी से संतोष कीजिए।
33. माता-पिता का मन व भाव हमेशा निर्दोष होते हैं। ये उन का विशेषाधिकार है
34.जीवन की कठिन परिस्थितियां ही जीवन को रोचक व रसिक बनाती है। मसालेदार भी बनाती है।
35.सूर्यप्रकास में बैठने से उर्जा मिलती है।
36.दूसरों के लिये सकारात्मक कार्य करने से हमें भी सकारात्मक फल मिलता है।
37.प्रत्येक दिन शांति व मस्ती से जिएं।
38.इच्छाओं का होना इंसान के जीवंत होने का प्रमाण है।
39.हमेशा सकारात्मक सोच रखिये। सकारात्मक विचार कीजिये।
40.आराम से सांस लें। अब जीवन में ज्यादा दौड़-धूप करनेकी जरुरत नहीं।
41.आप को जीवन कैसे जीना है। ये आप तय कीजिए।
42.जो होता है उस का शांति से स्वीकार कीजिये।
43.खुशमिजाज व मस्त मौले लोग सब को अच्छे लगते हैं।
44.एक मुस्कान को अनेक आशिर्वाद मिलते हैं।
कृपा कर के इस संदेश को अपने माता-पिता एवं बडों के साथ साझा(शेयर) कीजिए।
क्यों कि वे खुशी से, शांति से अच्छा स्वास्थ्य पूर्ण जीवन जी सके।🌿🙂
हमेशा स्वस्थ रहिये 🙏🏻💪☕
मंगलवार, अप्रैल 21
स्त्रियों की कार्य क्षमता (अनुदित)
लेखक – पी पी राठोड़ (सुरत)
अनुवादक – कुमार अहमदाबादी
क्या कभी इस विषय पर कोई सर्वेक्षण हुआ है। स्त्रियों के पास कितनी बौद्धिक क्षमता होती है?🤔😊😊😊👌👌👍👍
भारत के प्रत्येक घर में सुबह, दोपहर, शाम, सप्ताह के सातों दिन भोजन बनाया जाता है। रोटी, सब्जी, दाल चावल, विभिन्न चटनीयां, मिठाइयां, नमकीन भांति भांति के पकवान बनते हैं।
क्या कभी इस मुद्दे पर अभ्यास हुआ है? ये सब बनाने वाली स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा कितनी और कैसी होती है। 🤔
सच तो ये है। एसा कोई यंत्र कुदरत ने भी नहीं बनाया है। जो स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा को नाप सके। इन की बौद्धिक प्रतिभा इतनी विशाल, गहरी और सूक्ष्म होती है। उसे मापने की क्षमता इंसान में नहीं है।
🍲✨ रसोईघर सिर्फ बर्तनों का भंडार नहीं होता।
वो एक प्रयोगशाला होता है।
छौंकते समय तेल कितना चाहिये? राई सब तड तड बोलेगी? हल्दी कब डालनी है?
वो एक रासायणिक प्रयोगशाला होता है।
छौंकते समय कितना तेल चाहिये? हल्दी व मिर्च मसाले कितने चाहिये?
— ये गणित की कला है! ➗✨
गैस की आंच कब धीमी रखनी है? कौन सी बानगी में कडछा व कौन सी में चिपिया लेना है। कब कढ़ाई का और कब भगौने का उपयोग करना है? सबकुछ स्वयं स्फुरित होता है।
— ये physics! तापमान का खेल है 🔥⚙️
स्त्री ये कैसे मालूम करती है। भोजन पक गया है?
— ये आब्जर्वेशन की चरम सीमा पर
पहुंची कुशलता के कारण होता है।👀👌
एक साथ चार बानगियां बनाना और वो भी तय समय पर!
— ये वही कर सकता है जो मैनेजमेंट माहिर हो। 🕒💼
दूध उबल रहा हो, कुकर की सीटी की टाईमींग, तेल का तापमान, चाय ठंडी न हो जाने का ध्यान रखना…..
— ये सब multitasking की पराकाष्ठा होती है। 🤯👏
मीठा, तीखा… सिर्फ चपटी से जान लेना!
ये तो इनबिल्ट AI है।😄🔥
भोजन या खाद्य सामग्री ऋतु के अनुसार कितने दिन टिकेगी का अंदाज लगाना……
ये सिर्फ अनुभव नहीं होता है। इस का अपना विज्ञान है।
💛 रसोई बनाना सिर्फ कौशल्य नहीं है।
वो प्रेम, जिम्मेदारी और समर्पण भाव तीनों का परिपूर्ण संगम है।
शिक्षित न हों तो भी और
डिग्री न हों तो भी
अंग्रेजी न आती हो तो भी
रसोईघर को संचालित करने वाली स्त्री किसी मैनेजर से कम नहीं होती।
🙌👑💯
🌼 एक दिन निष्पक्ष भाव से देखना…
अपने बनाए भोजन तरफ व घर की स्त्री की तरफ–
आप को मालूम होगा। रोज इस कला के लिये कितना कौशल्य, त्याग व समर्पण भाव का उपयोग होता है।
रोज का त्याग रोज चमत्कार करता है✨🙏
हमें रोज तीन बार ताजा, गरम, स्वादिष्ट *भोजन* कैसे मिलता है।
🍛❤️
भोजन से पहले एक बार कुदरत द्वारा मिली। इस *रसोई की देवी* *अन्नपूर्णा* को मन की गहराईयों से धन्यवाद कहिये।
🙏
स्त्री में जो बुद्धि चातुर्य, सहनशीलता व प्रेम व समर्पण की ताकत है। उसे किसी पाठ्य पुस्तक या पाठ्य
क्रम से सीखा नहीं जा सकता। 💐❤️✨ 💛
—-पी पी राठोड़ (सुरत)
गुरुवार, अप्रैल 9
परमात्मा का आभार मानने के लिये दस अदभुत कारण
अनुदित
अनुवादक -महेश सोनी
वाहन चलाते समय टायर घिस जाते हैं। जब की जीवनभर दौडने के बाद भी आप के पैर के तलवे नये जैसे रहते हैं।
शरीर में ७५% पानी होता है। लाखों छिद्र होने के बावजूद एक बूंद पानी शरीर में से लीक नहीं होता है।
सहारे के बिना कुछ भी टिकता नहीं, स्थिर नहीं रहता। लेकिन शरीर अपना संतुलन बनाकर रखता है।
बैटरी कोई भी हो चार्ज किए बिना चलती या टिकती नही है। जब की हृदय जन्म से मृत्यु तक लगातार धडकता रहता है।
कोई भी पंप हमेशा नहीं चलता। लेकिन रक्त पूरी जिंदगी लगातार बहता रहता है।
विश्व के बढ़िया से बढ़िया कैमरों की भी मर्यादा होती है। लेकिन आंख हजारों मेगा पिक्सल के प्रत्येक दृश्य को देख सकती है। उस का विश्लेषण कर सकती है।
कोई भी लेबोरेट्री स्वाद का परीक्षण नहीं कर सकती। जीभ किसी भी साधन के बिना अनेकों स्वाद को पहचान लेती है।
सब से आधुनिक सेन्सर भी मर्यादित है। त्वचा सूक्ष्म से सूक्ष्म संवेदना का अनुभव कर सकती है।
कोई भी साधन प्रत्येक आवाज को उत्पन्न नहीं कर सकता। लेकिन गला हजारों फ्रीक्वेंसी के आवाज उत्पन्न कर सकता है।
कोई भी उपकरण आवाजों को पूर्ण रुप से डिकोड नही कर सकता। लेकिन कान प्रत्येक आवाज को समझते हैं; और अर्थ घटन भी करते हैं।
*ईश्वर ने हमें जो जो अनमोल सुविधाएं दी है। उस के लिये उस का आभार मानिये।*
और
*हमें कोई अधिकार नहीं है हम परमात्मा को शिकायत करें।*
*रोज सुबह उठना अपने आप में एक चमत्कार है!*
*इन सब के लिये सर्वशक्तिमान परमात्मा को धन्यवाद कहो*
🙏🏻
सोमवार, मार्च 23
पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा
🙏 पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा🙏
अनुवादक - महेश सोनी
मैं प्रतिज्ञाबद्ध रहूंगा,
हमारे लिये एवं हम सब की
भावि पीढीयों के लिये…
मैं दंतमंजन एवं दाढी करते समय पानी का उपयोग उसे टमलर में भरकर करुंगा। नल को खुल्ला नहीं छोडूंगा।
मैं भोजन करते समय जूठन नहीं छोडूंगा; अन्य किसी भी तरह अन्न का बिगाड़ नहीं करुंगा।
मैं लेखन कार्य करते समय कागज के दोनों तरफ लिखूंगा। कागज का व्यवस्थित उपयोग करुंगा।
मैं यहां वहां जहां तहां कूडा कर्कट नहीं फेकूंगा।
मैं जो उपयोगी न हो उन डिवाइस एवं चार्जर की स्विच तुरंत बंद कर दूंगा।
मैं AC, RO या वॉशिंग मशीन में से निकलने वाले पानी का दुबारा उपयोग करुंगा।
मैं नहाने के लिये फव्वारे के उपयोग ना कर के बाल्टी और टमलर का उपयोग करुंगा।
मैं जब भी घर से बाहर निकलूंगा; मेरे साथ वस्त्रों की एक बैग लेकर निकलूंगा।
मैं आज ही एक पौधा लगाउंगा; एवं पूरे मन से उस का जतन करुंगा।
मैं जब भी बाहर जाउंगा; पानी की बोतल अपने साथ रखूंगा।
मैं मेरे वाहनों की सफाई करने में पानी का उपयोग नही। करुंगा। कपड़े से उस की साफ सफाई करुंगा। ज्याद हुआ तो गीले कपडे से उसे साफ करुंगा।
मैं दूध का पाउच या अन्य कोई भी प्लास्टिक पाउच काटते समय ये ध्यान रखूंगा। कटने वाला टुकडा एकदम ही न कट जाये। कुछ हिस्सा जुडा रहे ताकि उस टुकडे के रुप में थोडा या प्लास्टिक भी उधर उधर बिखरने की संभावना समाप्त हो जाए।
मैं प्रयास करुंगा। प्लास्टिक के पैकेट में पैक नाश्ता ना करुं।
मैं प्रयास करुंगा। सूर्य प्रकाश और हवा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करुं। इस के लिये खिड़कियां व दरवाजों को खुल्ले रखूंगा।
मैं पक्षियों के लिये अपने आंगन या छत पर पानी से भरा बर्तन रखूंगा। उन के चुग्गे के लिये कुछ न कुछ अवश्य रखूंगा।
मैं नजदीक की किसी जगह जाना हो तो पैदल जाउंगा या सायकल का उपयोग करुंगा।
मैं बिना मतलब बल्ब, ट्यूब लाइट, पंखे या चार्जर की स्विच ऑन नहीं रखूंगा।
मैं जब जरुरत न हो तब…विशेष रुप से रात के मेरे मोबाइल डेटा और वाई फाई को बंद कर दूंगा।
जब मेरा वाहन चौराहे पर खडा होगा और मुझे सूचित करने वाले ट्राफिक सिग्नल के हरा होने में बीस(२०) से ज्यादा सेकंड से ज्यादा का समय होगा; तब मेरे वाहन का इंजन बंद कर दूंगा।
मैं वातानुकूलक(एयरकंडीशनर) का उपयोग कम करुंगा। जब उस का उपयोग करुंगा। तब उस का तापमान २४(चौबीस) से २६(छब्बीस) तक ही सीमित रखूंगा।
मैं उपयोग करो और फेंक दो(यूज एंड थ्रो) वाले साधनों का उपयोग नहीं करुंगा। एसे साधनो का उपयोग करुंगा। जिस का उपयोग एक से ज्यादा बार(रियूसेबल) किया जा सके।
मैं अखबार, गत्ते व उन के खाली डिब्बे, दूध की खाली थेलियां, ७५ माइक्रोन थैली, डिब्बियां…. जैसी पुर्न उपयोगी (रिसायक्लेबल) चीजों को कूडेदान में ना फेंककर उन्हें कबाडी को दे दूंगा।
मैं आज से ही कम से कम एक बाल्टी पानी बचाने का प्रयास करुंगा।
मैं परिवार के विशेष दिनों जैसे कि जन्म दिवस पर अन्य महत्वपूर्ण दिवसों पर एक पौधा लगाने का प्रयास करुंगा।
मैं वॉशिंग मशीन की क्षमता जितने मैले कपडे इकट्ठे होने पर ही उस का उपयोग करुंगा।
मैं मेरे घर में आने वाले रैपर/ एक बार उपयोगी प्लास्टिक का इकोब्रिक बनाउंगा।
मैं पर्यावरण को बचाने के लिये अथक प्रयास करुंगा।
मैं इस मैसेज को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाउंगा।
मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक खाली बोतल रखूंगा। उसे उसी समय कूड़ेदान में फेकूंगा।जब वो गैरजरूरी प्लास्टिक एवं अन्य कूडे से पूरा भर जाएगाी।
मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक और खाली बोतल रखूंगा। उस में फलों व सब्जियों के बीज इकट्ठे करुंगा। उन बीजों को किसी किसान या अन्य उचित व्यक्ति तक पहुंचाऊंगा। जिस के उन का उचित व सही उपयोग हो सके।
मैं भोजन बनाते समय व भोजन करते समय कम से कम बर्तनों का उपयोग करुंगा; ताकि उन्हें मांजते समय कम पानी का उपयोग हो।
👌*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि*👌
🙏जय श्री कृष्णा 🙏
रविवार, मार्च 15
આપણી ૧૪૮ જાતોનું વર્ણન
કોપી પેસ્ટ
બ્રાહ્મણની રસોઈ ને રાજપૂતની રીત,
વાણિયાનો વેપાર ને પારસીની પ્રીત,
નાગરની મુત્સદી ને વ્યાસની ભવાઈ,
લોહાણાની હુંસાતુંસી ને ભાટિયાની ભલાઈ,
આયરની રખાવટ ને ચારણની ચતુરાઈ,
મેમણની મક્કારી ને સૈયદની લુચ્ચાઈ,
કણબીની ખેતી ને સંધીની ઉઘરાણી,
પઠાણનું વ્યાજ ને ઘાંચીની ઘાણી,
મેરનો રોટલો ને પૂજારીનો થાળ,
કોળીની કરકસર ને ભક્તોની માળ,
વહિવંચાની બિરદાવળી ને ઢાઢીનાં વખાણ,
ભાટની કવિતા ને માણભટ્ટની માણ,
મણિયારાની ચૂડલી ને વાંઝાનો વણાટ,
ખવાસની ચાકરી ને ખત્રીનો રંગાટ,
સીદ્દીઓનો મસીરો ને કાગદીની શાઈ,
ખોજાના ડાળિયા ને કંદોઈની મિઠાઈ,
ચુંવાળિયાનું પગેરૂં ને વાઘેરની કરડાઈ,
આડોડિયાની ઝડઝપટ ને તરકની તોછડાઈ,
અબોટીનાં કીર્તન ને બદાણિયાની ઠેક,
સોમપુરાના મંદિરો ને ઘંટિયાની ખેપ,
સરૈયાનો સુરમો ને સુતારનું ઘડતર,
મોચીનાં પગરખાં ને કડિયાનું ચણતર,
વોરાની નમ્રતા ને વાળંદનો જવાબ,
પસાયતાનો ખુંખારો ને દરવાણીનો રૂવાબ,
ખારવાનું વહાણવટું ને લોધીની જાળ,
દરજીનો ટાંકો ટેભો ને પ્રજાપતિનો ચોફાળ,
નાડીયાનું ગાડાનારણ ને કાયસ્થની કલમ,
વૈદ્યનું પડીકું ને ગંજેરીની ચલમ,
રામાનંદીની આરતી ને મુલ્લાની બાંગ,
ભોઈનું રાંધણું ને ભરવાડોની ડાંગ,
સિપાઈનો સાફો ને નટડાનો દોર,
કાશીના પંડિતો ને તીરથના ગોર,
વાળંદની હજામત ને ચામઠાની શાન,
લુહારિયાની અટાપટી ને ડફેરનું નિશાન,
કબ્બાડીની કુહાડી ને ભીલનું તીર,
શીખની ઉતાવળ ને ધૂળધોયાની ધીર,
માધવિયાની કે’ણી ને ભવાયાનો ભાગ,
ઢાઢીની રામલીલા ને ધૂતારાનો લાગ,
મતવાનું મૈયારૂં ને રાંકાની રાબ,
ભીખારીની ઝોળી ને માળીની છાબ,
નાથનો રાવણહથ્થો ને ભાંડના ગાલ,
ચોરટાની શિયાળી ને તસ્કરનો ખ્યાલ,
મલ્લની કુસ્તિ ને બહુરૂપીનો વેશ,
જાદૂગરની ચાલાકી ને માલધારીનો નેસ,
ભોપાનો ભભકો ને રબારીની પુંજ,
ભરથરીનું ખપ્પર ને શેતાનની સૂઝ,
પ્રશ્નોરાનું વૈદું ને નાઘોરીનો નાતો,
સાધુનું સદાવ્રત ને કસાઈનો કાતો,
લંઘાના ત્રાસાં ને તૂરીનું રવાજ,
કામળિયાના કાંસિયા ને ડબગરનું પખાજ,
રખેહરનો ઢોલ ને મીરની શરણાઈ,
મારગીનો તંબૂરો ને ધોબીની ધોલાઈ,
જંગમનો ટોકરો ને રાવળનું ડાક,
વાદીની મોરલી ને બારવટિયાની ધાક,
લંઘીના રાજિયા ને યોગીની મોજ,
જત્તીનો ત્યાગ ને ફિરંગીની ફોજ,
વાંસફોડાના વાંસ ને હિજડાની તાળી,
ગોકળીનો ગોફણિયો ને રાજૈયાની થાળી,
સલાટની ઘંટી ને પીંજારાની તળાઈ,
સંઘાડિયાનો ઢોલિયો ને મજૂરની કમાઈ,
સંન્યાસીનું મુંડન ને જોગીની ધૂણી,
ફકીરની કદુવા ને શરાફીની મૂડી,
લુહારની ધમણ ને ગાંધર્વનું ગાણું,
જૈનોના ઉપવાસ ને સુરતીનું ખાણું,
મેઘવાળની મજૂરી ને ઘાંચીની ધાર,
દાડીયાની દાતરડી ને ખાણીયાનો ડાર,
માજોઠીનું ગધેડું ને ચુનારનો ભઠ્ઠો,
જતની સાંઢડી ને વણઝારાની પોઠયો,
ઘેડિયાની ટીપણી ને પઢોરાના રાસ,
કલાલનો દારૂ ને કઠિયારાનો કાંસ,
થોરોની ઈંઢોણી ને ચમારનો કુંડ,
સ્વામિનારાયણનો ચાંદલો ને અતિતનું ત્રિપુંડ,
મુંડાનો વાંદરો ને દેવીપૂજકની વઢવેડ,
વેરીયાની કરવત ને હિજરતની હેલ્ય...
~ કવિ પિંગળશીભાઈ મેઘાણંદ ગઢવી. 🙏👍🙏
मेरा परिचय
n t s o o S e p d 3 9 Shared with On मेरा नाम महेश सोनी है। गुजराती माध्यम में कक्षा 11 तक शिक्षा प्राप्त की है। जडतर ज्वैलरी का कलाकार था...
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