Translate

बुधवार, फ़रवरी 4

बेटी क्या है? और क्या नहीं?

 

बेटी क्या है? और क्या नहीं?🌹


🌞 सूरज के घर बेटी होती व उसे विदा करने की घडी आयी होती तो सूर्य को पता चलता की अंधकार किसे कहा जाता है ?……

-----------------

✍ “बेटी” क्या होती है?"

🌹““बे”” - 👉 हृदय के साथ जुडी अटूट सांस…….

🌹““टि”” - 👉 कस्तूरी के समान हमेशा सुगंधित 

🌹 ""यां"" - 👉 रिद्धि - सिद्धि लानेवाली एवं परिवार को रोशन करने वाली एक परी….🖌🌹❣


-----------------

🌹 किसी भी परिवार में पिता को भोजन कराने का अधिकार 

सिर्फ और सिर्फ एक बेटी के पास होता है।

🌹 प्रत्येक बेटी सब से ज्यादा प्रेम अपने पिता से करती है।

🌹 बेटी जानती है। समग्र विश्व में यही एक एसा पुरुष है। जो कभी उसे दुःखी नहीं करेगा।


🌹बेटी दाम्पत्य का दीपक

एक बार एक चर्चा के दौरान एक मित्र ने कहा 


🌹“मैं मेरी पत्नी से ज्यादा प्रेम मेरी बेटी से करता हूं।


🌹आज भी जब भी मैं अस्वस्थ होता हूं तब ससुराल से तुरंत दौडी चली आती है। उस को देखते ही मैं मेरे सारे दुःख भूल जाता हूं।

🌹मुझे लगता है। शायद इसी वजह से उस की बिदाई के पलों में माता से ज्यादा दुःख पिता को होता है।

 🌹 क्यों कि माता रो सकती है, पिता आसानी से रो नहीं सकता।

बेटी के बीस बाईस की होने तक माता पिता को उस के प्रेम की लय लग जाती है। 

🌹 बेटी कभी माँ बन जाती है तो कभी दादी बन जाती है। कभी मित्र बन जाती है।


🌹सुख के समय बेटी पिता की मुस्कान बन जाती है और 

🌹 दुःख के समय में पिता के आंसू पोंछने वाली हथेली बन जाती है।

देखते ही देखते बेटी बडी हो जाती है। एक दिन लाल जोडे में नववधू बनकर विदा हो जाती है। 


🌹 जाते समय वो पिता के सीने से लगकर सजल नेत्रों से कहती है।

🌹 पापा, मैं जा रही हूं…. आप मेरी तनिक भी चिंता मत करियेगा।

समय समय पर अपनी दवाइयां लेना मत भूलना।



🌹 उस पल पिता द्वारा आंसूओं को रोकने से अनेक प्रयासों के बावजूद वे की सरहद लांघकर गंगा की तरह बह निकलते हैं। 

🌹 कवि कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतल में कण्व ऋषि शकुंतला को विदा करते हुए कहते हैं,

🌹🌹मेरे जैसे संसार का त्याग कर के वनवासी बने व्यक्ति को अगर पुत्री की बिदाई इतनी पीडा दे सकती है तो संसारी व्यक्तिओं की पीडा कितनी गहन होगी?


🌹 मैं एक बार एक शादी में गया था। मित्र की पुत्री की शादी थी।

बेटी को विदा करने के पश्चात वो एकदम पस्त होकर बैठे उस मित्र ने 

कहा था : - : 


🌹 आज तक मैंने कभी परमात्मा के सामने प्रार्थना नहीं की है। लेकिन आज मन कर रहा है - हर बेटी के बाप को परमात्मा से ये प्रार्थना करनी ही चाहिये- 

🙏👏 हे परमात्मा, आप संसार के सारे पुरुषों को बहुत समझदार व विवेकशील बनाना; क्यों कि उन्हीं में से कोई एक मेरी पुत्री का पति बनने वाला है।


🌹 संसार की सारी स्त्रियों को ममतामयी बनाना। उन्हीं में से कोई मेरी बेटी की सास या ननद बनने वाली है।


🌹 भगवान, तुम्हें अगर पूरी सृष्टि का पुनः निर्माण करना पडे तो मेरी बेटी के भाग्य में सुख ही सुख लिखना। दुःख नाम का कहीं उल्लेख मत करना।


🌹 कुछ समय पहले ही सेवा निवृत्त हुए एक आचार्य ने एक बात कही थी:

🌹अगर आप के घर में बेटी ना हो तो पिता पुत्री के संबंध की गहराई को आप कभी जान नहीं पाएंगे। 


 🌹आप सिर्फ इतना सा करना।


🌹चाहे जैसी परिस्थितियां हो, चाहे जितने आपसी मनमुटाव हो। लेकिन 


पुत्रवधू को


उस के पिता के बारे में कभी किसी भी प्रकार के कटु वचन मत सुनाना।

अनुवादक - महेश सोनी 


🌹 बेटी भगवान के बारे में कटु वचन सुन सकती है लेकिन अपने पिता के विरुद्ध एक अक्षर नहीं सुन सकती।

 -----------------

❤️ अगर आप को ये लेख अच्छा लगे तो इसे बे

टी के माता पिता, सास ससुर, भाई बहन को अवश्य भेजना।

🌹🌹🌹🌹🌹

मंगलवार, फ़रवरी 3

चार साथी एक बोतल चाहिये (ग़ज़ल)


चार साथी एक बोतल चाहिये 

प्लेट में काजू तथा जल चाहिये 


ज़िंदगी में रंग भरने के लिये 

श्रीमती थोड़ी सी चंचल चाहिये 


उच्च स्तर की जब ग़ज़ल लिखनी हो तब

शांत मन में भाव कोमल चाहिये 


क्या गज़ब की सोच है मैं क्या कहूं 

कोशिशों के बिन तुझे हल चाहिये 


जानते हो नृत्य करने के लिये 

हो कहीं भी मंच समतल चाहिये 


चाहिये ना और कुछ तुम से “कुमार”

प्रेम से परिपूर्ण संबल चाहिये 


कुमार अहमदाबादी  

शनिवार, जनवरी 31

छाछ मांगने में लोटा खोया

 हिन्दी में एक कहावत छाछ मांगने गयी थी लेकिन लोटा खोकर आयी है


सब को नहीं मालूम की तजाकिस्तान में भारत का एयरबेस(हवाई थाना) है। भारत उस के लिये काफी बडी रकम चुकाता है। 


मगर अब तजाकिस्तान में वो एयरबेस नहीं है। 

पाकिस्तान उस एयरबेस से बहुत परेशान रहता था। भारत के लडाकू फाइटर हवाई जहाज लगातार उस के सिर पर सवार से रहते थे।

पाकिस्तान ने तजाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिये तुर्की और कतर का संपर्क किया। उन के कहा वे भारत के एयरबेस बंद करवाये। 

तजाकिस्तान ने उन के पर भारत पर दबाव बनाया। 


पाकिस्तान खुश था क्यों कि अब लहंगा फाड़ना बाकी रहा था। 


जैसे ही तालिबान को इस मामले का पता चला। उन्होंने अपना बगराम एयरबेस भारत को देने का प्रस्ताव रखा। भारत ने प्रस्ताव पर तुरंत स्वीकृति की मोहर लगा दी। यहां पाकिस्तान के लिये वो कहावत *लेने गयी पूत खो आई खसम* (बेटा पैदा करने के चक्कर में पति को खो दिया) सटीक बैठती है। अब भारत तजाकिस्तान के एयर बेज से सारे साजो सामान बगराम में ले जा रहा है।  

"बानरा" ने स्वयं बगराम एयरबेस पर कब्जा करने का प्रयास किया होने के कारण उसे मालूम था। पाकिस्तानी सुअरों ने उस में दखल दी है। उन को फंसाकर अपना खेल बिगाड़ने के बाद उसने इन सुअरों को फिर से FATF की ग्रे सूचि में डाल दिया है; और अब वो विश्व बैंक द्वारा मिलने वाली लोन की किस्त भी को भी अटका देगा। 


इस सब के दरमियान भारत के जो लडाकू जहाज तजाकिस्तान से हट गये थे। वे अब बगराम में जैसे एकदम उन की छाती पर तैनात है।


एक दूसरी बात: "एसे समाचार हैं कि बगराम के बदले में भारत अफगानिस्तान सात एसे नोन रिफंडेबल प्रोजेक्ट में धन की आपूर्ति करेगा। एसा सुनने में आया है कि उन प्रोजेक्ट्स में एक प्रोजेक्ट एक एसी नदी उश पर बांध बांधने का है। जिस का लगभग पूरा पानी बहकर पाकिस्तान में जाता है। 


अब मुझे बताइये मुनीर और शाहबाज का लहंगा फटा है या नहीं फटा? 🤷🏻‍♂️

अद्वितीय रामभद्राचार्य (अनुदित)

दुनिया उन को अंधा कहती है

अभी माघ मेले में दो करोड़ की कार में घूमने वाले बकरा कट दाढ़ीवाले शंकराचार्य ने पूज्य रामभद्राचार्य के बारे में अभद्र टिप्पणी की है। इस नालायक को सपा+खांग्रेस(मुस्लिम लीग) ने 2027 के चुनावों के लिए किराए पर रखा है। (सुप्रीम कोर्ट का अभ्यास करना))📚 


मगर सत्य ये की उन्होंने जो देखा है उसे आंखों वाले भी नहीं देख सकते।

आज वे 75 वर्ष के है

जन्म से अंध

लेकिन उन के ज्ञान के सूर्य की रोशनी अद्वितीय है।

उन का नाम है—

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य


बचपन से ही उन का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं रहा है


पाठशाला में किसी भी कक्षा में 99 प्रतिशत से कम गुण नहीं आये


दुनिया उन को अंध कहती थी। लेकिन‌ वे शास्त्रों से रोशनी प्राप्त करते रहे।

 

230 से ज्यादा किताबें


संस्कृत, वेद, रामायण, दर्शन शास्त्र, व्याकरण प्रत्येक क्षेत्र में हस्ताक्षर किये।


कई युनिवर्सिटीयों ने उन्हें महामहोपाध्याय एवं जगद्गुरु की पदवीयां प्रदान की।

परंतु इतिहास उन्हें श्री राम जन्मभूमि केस के लिये याद रखेगा।


जब एक संत अदालत में खडे थे।


इलाहाबाद हाईकोर्ट


तीन सौ वकीलों से भरी हुई अदालत


दलीलें, कोलाहल, राजनीति और अविश्वास से भरा हुआ वातावरण


और बीच मे खडे -


एक अंध संत


उन्हें पूछा गया “क्या रामचरितमानस में राम के जन्म स्थान का कोई उल्लेख है?


उन्होंने एक भी पल हिचकिचाए बिना तुलसीदास जी का दोहा पढा।

*तुरंत दूसरा आक्रमण हुआ-*

“क्या वेदों में कोई साक्ष्य है। जो ये सिद्ध कर की श्री राम का जन्म यहां हुआ था”


इस बार उत्तर और भी गहन था।


उन्होंने कहा, “अथर्व वेद, दसवें अध्याय के इकत्तीसवें मंत्र में स्पष्ट रुप से उल्लेख है”


अदालत स्तब्ध हो गयी

उस के बाद न्यायाधीशों की बेंच में से-

जिस में एक मुस्लिम न्यायाधीश भी थे - का वो ऐतिहासिक निवेदन आया।


साहब, आप एक दिव्य आत्मा हो


सुबूत के 441 टुकड़े


अदालत ने उन में से 437 को मान्य रखा


कल्पना कीजिए–


दुनिया जिसे अंध कहती है।


वो भारत के सब से ज्यादा विवादास्पद इतिहास को सुबूतों को साथ देख रहे थे



एक बार जाने कौन से राजनीतिक लाभ के लिये ये कदम भी उठाया गया था


जब एक राजनीतिक सौगंध पत्र में कहा गया कि,


“राम का जन्म हुआ ही नहीं था”


तब ये संत ने मुंह पर ताला लगा लिया था


उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखा—और सिर्फ एक वाक्य ने सब को मौन कर दिया था।


“आप के गुरु ग्रंथ साहिब में,


राम नाम का 5600 बार उल्लेख हुआ है।


ये तर्क नहीं था


ये सांस्कृतिक स्मृति थी


क्या वे सचमुच अंध हैं?


प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने एक बार उन से कहा था “मैं आप के उपचार और दर्शन की व्यवस्था कर सकती हूं।


संत ने हंसकर कहा था “मैं इस दुनिया को नहीं देखना चाहता”


एक बार उन्होंने कहा था “मैं अंध नहीं हूं”


मैंने अंध होने का कभी भी लाभ नहीं लिया है


मैं भगवान श्री राम को बहुत नजदीक से देखता हूं


उसी क्षण उन के मन में एक बात घर कर गयी


आंखों से देखना और दर्शन करना दो अलग अलग घटनाएं हैं


सनातन की जीती जागती मशाल


एसे संत शास्त्रों में नहीं, वास्तव में और ऐतिहासिक काल में जन्म लेते हैं। इन का अस्तित्व चमत्कार करने के लिये नहीं; बल्कि सभ्यता को दर्पन दिखाने के लिये होता है।

आज अगर सनातन संस्कृति सांस ले रही है, जीवंत है तो एसे मौन तपस्वीओं के कारण सांस ले रही है, जीवंत है।

उन्हें अंध कहना हमारे अंधत्व को दर्शाता है।

एसे संतों को वंदन

एसी चेतना को वंदन


जय श्री राम 🚩🙏

अनुवादक - कुमार अहमदाबादी 

सोमवार, जनवरी 26

परिवार तोडिये बाज़ार बनाइये

 परिवार तोडिये बाज़ार बनाइये

आप को इस का रतीभर भी एहसास नहीं है कि कौन हम सब को कठपुतली की नचा रहा है।

1)

जब विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे होते हैं तब होशियार विद्यार्थी को मल्टीनेशनल कंपनी तुरंत बडे पैकेज के साथ नौकरी दे देती है..! साथ ही साथ उस का तबादला होता रहता है। विदेश जाना भी होता है।

2)

विश्व सुंदरी के पुरस्कार द्वारा प्रचार + फिल्मों के माध्यम से + फिटनेस का उन्माद एवं विज्ञापन द्वारा श्रंगार बाजार का निर्माण कर के उस की तरफ चुंबक सा खिंचाव पैदा जाता है।

3)

प्रत्येक व्यक्ति के पास मोबाइल+ वाहन =एक बड़ा बाजार 

4)

ब्रांडेड उपकरण को एक आकर्षण पैदा कर के आप के सामने ऑनलाइन सस्ते दामों का लालच देकर परोसा जाता है। 

5)

प्राइवेसी शादीशुदा जोडों का अधिकार है; कहकर पारिवारिक वातावरण को दूषित किया जाता है। लेकिन लोग ये नहीं समझ सकते की ये संयुक्त परिवार को खंडित करने का षडयंत्र है। 

6)

हम दो हमारे दो…जैसी भावना में बहकर और देर से शादी करने के चक्रव्यूह में फंसा हिन्दू भविष्य के 100 वर्ष बाद के हिन्दूओं के लिये गुलामी का प्रबंध कर रहा है।

7)

बच्चों को सात्विक लड्डू + घर का भोजन + घरेलू मिठाइयों से दूर करने वाले विज्ञापन + सोशियल मिडिया की रील से युवा पीढी को वैचारिक दृष्टिकोण से कमजोर किया जा रहा है। 

8)

टुरिज्म के क्षेत्र में परोक्ष रुप से भारतीय त्यौहारों के प्रति उदासीनता निरसता फैलाकर संस्कृति से दूर करने का षडयंत्र कितने लोगों को समझ में आ रहा है। 

9)

वातानुकूलित(एयर कंडीशंड) ऑफिस की लालच ने नौजवानों को परावलंबी(दूसरों पर निर्भर) कर दिया है। नौकरी कर के प्राइवेट बैंक से लोन लेकर वैभवशाली जीवन जीने की मानसिकता के फलस्वरूप विदेशी बाजारों ने भारतीयों को घेर लिया है; बल्कि कहना चाहिए जकड़ लिया है।

10)

स्वदेशी उपकरण + स्वदेशी सामग्री को तुच्छ माना जाता है। जब की विदेशी उपकरण + सामग्री को श्रेष्ठ माना जाता है। जब की इस अवधारणा ये सोच से भारतीय कौशल + स्वावलंबी + आत्मनिर्भरता से विपरीत आचरण किया जा रहा है। 

11)

सतीत्व + पवित्रता + प्रामाणिकता को तिलांजली देकर लिव इन रिलेशन वाला समाज हमारे बन रहा है। अनैतिक संबंध, अन्यत्र संबंध मनोरंजन के किसी प्रकार की नैतिक सोच से हटकर बन रहे हैं। 


एसे अनेक शकुनि की चाल जैसे पासे हमारी सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों के नष्ट करने के लिये फेंके गये हैं; और आज भी फेंके जा रहे हैं।‌ जिन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सभ्यता को जडों सहित उखाडने का है। ये विदेशी शक्तियों द्वारा भारतीयों को मानसिक + सामाजिक रुप से विकलांग व गुलाम बनाने की एसी रणनीति है। जो 99.99 प्रतिशत हिन्दूओं को समझ में नहीं आ रही है। एसा नहीं है की मैं ये षडयंत्र समझ सका हूं इसलिए मैं ही विद्वान हूं। प्रत्येक व्यक्ति ये समझता है लेकिन स्वीकार नहीं करता। स्वयं को आधुनिक विचारधारा वाला मानते हैं। मेरे जैसों को संकीर्ण मानसिकता + गंवार + अज्ञानी आदि आदि मानते हैं; एवं स्वयं बाजार का प्यादा बनकर गर्वान्वित महसूस करते हैं। 


अब ये हम सब को यानि आप को मुझ को इस को उस को सब को मिलकर विचार + विमर्श + विवेक से ये तय करना है। भारत के भविष्य को बाज़ार का खिलौना बनने से कैसे रोका जाए? मैं शत प्रतिशत विश्वास से कह सकता हूं। एक एक भारतीय की यही इच्छा व राय होगी। भारत के भविष्य के बाजार को विदेशी हाथों का खिलौना बनने से रोकना है।


जय श्री कृष्णा

 

भारत माता की जय 

वंदे मातरम्….






भाव मंथन से जनमती है ग़ज़ल (ग़ज़ल)


शायरों के भाव मंथन से जनमती है ग़ज़ल 

रागिणी का साथ मिलने पर थिरकती है ग़ज़ल 


तृप्त जब होती है शायर की अधूरी आरज़ू 

कल्पनाओं के क्षितिज पर तब उभरती है ग़ज़ल 


मेनका मदमस्त होकर नृत्य जब करती है तब 

उस की हर मुद्रा से टप टप टप टपकती है ग़ज़ल 


काव्य के आकाश में लाखों सितारे हैं मगर

काव्य-नभ में ध्रुव सितारे सी चमकती है ग़ज़ल


अर्क छिड़के कागज़ों पर जब लिखी जाती है ये 

कल्पना कहती है पुष्पों सी महकती है ग़ज़ल 


शौक है इस को भी सजने का संवरने का ‘कुमार’

प्रास अलंकारों से नित सिंगार करती है ग़ज़ल

कुमार अहमदाबादी 

गुरुवार, जनवरी 22

अनेकार्थक शब्द



- *पट* – वस्त्र, पर्दा, दरवाजा, स्थान, चित्र का आधार।


- *पत्र* – चिट्ठी, पत्ता, रथ, बाण, शंख, पुस्तक का पृष्ठ।


- *पद्म* – कमल, सर्प विशेष, एक संख्या।


- *पद* – पाँव, चिह्न, विशेष, छन्द का चतुर्थाँश, विभक्ति युक्त शब्द, उपाधि, स्थान, ओहदा, कदम।


- *पतंग* – पतिँगा, सूर्य, पक्षी, नाव, उड़ाने का पतंग।


- *पय* – दूध, अन्न, जल।


- *पयोधर* – बादल, स्तन, पर्वत, गन्ना, तालाब।


- *पानी* – जल, मान, चमक, जीवन, लज्जा, वर्षा, स्वाभिमान।


- *पुष्कर* – तालाब, कमल, हाथी की सूँड, एक तीर्थ, पानी मद।


• *पृष्ठ* – पीठ, पीछे का भाग, पुस्तक का पेज।


- *प्रत्यक्ष* – आँखोँ के सामने, सीधा, साफ।


- *प्रकृति* – स्वभाव, वातावरण, मूलावस्था, कुदरत, धर्म, राज्य, खजाना, स्वामी, मित्र।


- *कल* – मशीन, आराम, सुख, पुर्जा, मधुर ध्वनि, शान्ति, बीता हुआ दिन, आने वाला दिन।


- *कक्ष* – काँख, कमरा, कछौटा, सूखी घास, सूर्य की कक्षा।


- *कर्ता* – स्वामी, करने वाला, बनाने वाला, ग्रन्थ निर्माता, ईश्वर, पहला कारक, परिवार का मुखिया।


- *कलम* – लेखनी, कूँची, पेड़-पौधोँ की हरी लकड़ी, कनपटी के बाल।


- *कलि* – कलड, दुःख, पाप, चार युगोँ मेँ चौथा युग।


- *कशिपु* – चटाई, बिछौना, तकिया, अन्न, वस्त्र, शंख।


- *काल* – समय, मृत्यु, यमराज, अकाल, मुहूर्त, अवसर, शिव, युग।


- *काम* – कार्य, नौकरी, सिलाई आदि धंधा, वासना, कामदेव, मतलब, कृति।


- *किनारा* – तट, सिरा, पार्श्व, हाशिया।


- *कुल* – वंश, जोड़, जाति, घर, गोत्र, सारा।


- *कुशल* – चतुर, सुखी, निपुण, सुरक्षित।


- *कुंजर* – हाथी, बाल।


- *कूट* – नीति, शिखर, श्रेणी, धनुष का सिरा।


- *कोटि* – करोड़, श्रेणी, धनुष का सिरा।


- *कोष* – खजाना, फूल का भीतरी भाग।


- *क्षुद्र* – नीच, कंजूस, छोटा, थोड़ा।


- *खंड* – टुकड़े करना, हिस्सोँ मेँ बाँटना, प्रत्याख्यान, विरोध।


- *खग* – पक्षी, बाण, देवता, चन्द्रमा, सूर्य, बादल।


- *खर* – गधा, तिनका, दुष्ट, एक राक्षस, तीक्ष्ण, धतूरा, दवा कूटने की खरल।


- *खत* – पत्र, लिखाई, कनपटी के बाल।


- *खल* – दुष्ट, चुगलखोर, खरल, तलछट, धतूरा।


- *खेचर* – पक्षी, देवता, ग्रह।


- *गंदा* – मैला, अश्लील, बुरा।


- *गड* – ओट, घेरा, टीला, अन्तर, खाई।


- *गण* – समूह, मनुष्य, भूतप्रेत, शिव के अनुचर, दूत, सेना।


- *गति* – चाल, हालत, मोक्ष, रफ्तार।


- *गद्दी* – छोटा गद्दा, महाजन की बैठकी, शिष्य परम्परा, सिँहासन।


- *गहन* – गहरा, घना, दुर्गम, जटिल।


- *ग्रहण* – लेना, सूर्य व चन्द ग्रहण।


- *गुण* – कौशल, शील, रस्सी, स्वभाव, विशेषता, हुनर, महत्त्व, तीन गुण (सत, तम व रज), प्रत्यंचा (धनुष की डोरी)।


- *गुरु* – शिक्षक, बड़ा, भारी, श्रेष्ठ, बृहस्पति, द्विमात्रिक अक्षर, पूज्य, आचार्य, अपने से बड़े।


- *गौ* – गाय, बैल, इन्द्रिय, भूमि, दिशा, बाण, वज्र, सरस्वती, आँख, स्वर्ग, सूर्य।


- *घट* – घड़ा, हृदय, कम, शरीर, कलश, कुंभ राशि।


- *घर* – मकान, कुल, कार्यालय, अंदर समाना।


- *घन* – बादल, भारी हथौड़ा, घना, छः सतही रेखागणितीय आकृति।


- *घोड़ा* – एक प्रसिद्ध चौपाया, बंदूक का खटका, शतरंज का एक मोहरा।


- *अंक* – संख्या के अंक, नाटक के अंक, गोद, अध्याय, परिच्छेद, चिह्न, भाग्य, स्थान, पत्रिका का नंबर।


- *अंग* – शरीर, शरीर का कोई अवयव, अंश, शाखा।


- *अंचल* – सिरा, प्रदेश, साड़ी का पल्लू।


- *अंत* – सिरा, समाप्ति, मृत्यु, भेद, रहस्य।


- *अंबर* – आकाश, वस्त्र, बादल, विशेष सुगन्धित द्रव जो जलाया जाता है।


- *अक्षर* – नष्ट न होने वाला, अ, आ आदि वर्ण, ईश्वर, शिव, मोक्ष, ब्रह्म, धर्म, गगन, सत्य, जीव।


- *अर्क* – सूर्य, आक का पौधा, औषधियोँ का रस, काढ़ा, इन्द्र, स्फटिक, शराब।


- *अकाल* – दुर्भिक्ष, अभाव, असमय।


- *अज* – ब्रह्मा, बकरा, शिव, मेष राशि, जिसका जन्म न हो (ईश्वर)।


- *अर्थ* – धन, ऐश्वर्य, प्रयोजन, कारण, मतलब, अभिप्रा, हेतु (लिए)।


- *अक्ष* – धुरी, आँख, सूर्य, सर्प, रथ, मण्डल, ज्ञान, पहिया, कील।


- *अजीत* – अजेय, विष्णु, शिव, बुद्ध, एक विषैला मूषक, जैनियोँ के दूसरे तीर्थँकर।


- *अतिथि* – मेहमान, साधु, यात्री, अपरिचित व्यक्ति, अग्नि।


*🏆 

बेटी क्या है? और क्या नहीं?

  बेटी क्या है? और क्या नहीं?🌹 🌞 सूरज के घर बेटी होती व उसे विदा करने की घडी आयी होती तो सूर्य को पता चलता की अंधकार किसे कहा जाता है ?…… ...