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शुक्रवार, मई 1

संस्कार सिंचन

 बच्चों में संस्कारोँ का सिंचन

आवणारी पेढ़ीओ लणती रहे
सदविचारो जो तमे वावी सको
सुरेश विराणी
कवि कि सुरेश विराणी कि उपरोक्त पंक्तियाँ गहन अर्थ रखती हैं. पहले गुजराती भाषा के इस शेर का भावार्थ स्पष्ट कर दूँ। शेर का भाव है कि अगर आज बोएंगे तो आनेवाली पीढ़ियां सदविचारों कि फसल को काट सकेगी। अगर भावि पीढ़ियों को संस्कारी बनाना है तो आज से ही कार्य शुरू करना होगा। ये बहुत महत्वपूर्ण विचार है। कवि ने खेती के प्रतिक के सहारे दो पंक्तियों में विशाल व गहन अर्थ रखनेवाली बात कही है। ये तो सब चाहते हैं कि मैं बच्चे में सद्विचारों का सिंचन करूँ। मगर कितने लोग सफल होते हैं? कितने लोग बच्चों में संस्कारों का सिंचन करनेवाली सही प्रक्रिया से गुजरते हैं?
कुछ साल पहले मैंने महाराष्ट्र के एक भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश का वक्तव्य सुना था। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही कि, "पहले माँ बाप बिगड़ते हैं फिर बच्चे बिगड़ते हैं। पहले बीज बिगड़ता है फिर फसल बिगड़ती है,"इस बात के समर्थन में उन्हों ने जो घटना सुनाई वो प्राय हर घर में घटित होती है। जिस से बात न करनी हो ऐसे व्यक्ति का फोन आने पर माता-पिता अक्सर फोन बच्चे के हाथ में पकड़ाकर कहते हैं कि कह दे "पापा घर पर नहीं है या मम्मी घर पर नहीं है" क्या ऐसा कर के माँ बाप बच्चों में गलत संस्कारों के बीज बोने का कार्य नहीं करते हैं? इस तरह की छोटी छोटी कई घटनाओं द्वारा माँ बाप बच्चों में कुसंस्कारों के बीज बोते हैं। जैसे कि "अब की बार मामाजी तुम्हें कुछ कहें तो तुम भी साफ साफ ये कह देना" या खुद कह देते हैं कि "खबरदार जो मेरे बच्चे को कुछ कहा"। कौन सोचता हैं की ऐसा कर के मैं गलत कर रहा हूँ।
बच्चों में संस्कारों एवं सदविचारों का सिंचन करने की प्रक्रिया लम्बी व धैर्य की परीक्षा लेनेवाली प्रक्रिया है। जिस तरह अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए किसान को एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उसी तरह बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए माता पिता को भी लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ये प्रक्रिया माता पिता के धैर्य की कसोटी करती है। लेकिन ये भी सच है क़ि जिस तरह किसान अच्छी फसल प्राप्त करने की प्रक्रिया से गुजरे बगैर अच्छी फसल प्राप्त कर नहीं सकता। माता पिता भी बच्चों को संस्कारी बनाने क़ि प्रक्रिया से गुजरे बगैर बच्चों को संस्कारी बना नहीं सकते।
फसल प्राप्त करने के लिए किसान पहले खेत जोतता है, फिर बीज बोता है, फिर पानी से सिंचन करता है। बीजों के अंकुरित होने से लेकर कटाई तक तथा जंगली जानवरों एवं शत्रु से फसल को बचाने के लिए निगरानी करता है। फसल को कोई रोग ना लगे, इसलिए कीटनाशक पदार्थों का उपयोग करता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौसम मेहरबान रहे तो अच्छी फसल तैयार होती है। पूरी प्रक्रिया में कहीं भी थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो सारी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा रहता है। इसी तरह बच्चों में संस्कारों का सिंचन करना भी पल दो पल या महीने दो महीने की प्रक्रिया नहीं। ये एक लम्बी प्रक्रिया बल्कि कहना चाहिए की एक लम्बी साधना है।
बच्चों द्वारा सिखने की प्रक्रिया गर्भावस्था से ही शुरू हो जाती है। अभिमन्यु ने चक्रव्यूह के बारे में जानकारी कब प्राप्त की थी? अगर अभिमन्यु की कथा इस बात का प्रमाण है क़ि बच्चा गर्भावस्था से ही सीखना, ज्ञान प्राप्त करना शुरू कर देता है। गर्भावस्था के दौरान माँ जो कुछ भी: सुनती हैं, सोचती हैं, समझती हैं , देखती हैं. पढ़ती हैं, खाती हैं, पीती हैं: का असर बच्चे पर पड़ता हैं। माँ अगर धार्मिक ग्रंथ पढ़ती हैं तो बच्चे में धार्मिक संस्कारों के विकसित होने क़ी सम्भावनाएं ज्यादा होती हैं. माँ वाहियात टीवी सीरियलें देखती हैं; तो कुसंस्कारों के बीज विकसित होने क़ि सम्भावनाएं ज्यादा होती हैं। बच्चे के जन्म के बाद संस्कारों के सिंचन की प्रक्रिया आगे बढाती हैं। यूँ समझिये कि वो बीज के अंकुरित होने के बाद की स्थिति होती हैं.
बच्चे कुसंस्कारों का विष पी न जाये। इसलिए टीकाकरण भी जरुरी हैं। बच्चों को ये बताते रहना जरुरी हैं कि कुसंस्कार, अनीति, जूठ,छल, प्रपंच का फल हमेशा बुरा फल मिलता हैं। जब कि सत्य, निष्ठा, ईमानदारी, सद्गुणों का फल हमेशा अच्छा मिलता हैं। बच्चों का 'टीकाकरण' करने के लिए छत्रपति शिवाजी व उन की माता माता जीजाबाई, सरदार वल्लभभाई पटेल, स्वामी विवेकानंद तथा और भी ऐतिहासिक पात्रों कि कथाएं सुनायी जानी चाहिए। इतिहास में ऐसी बहुत सी कहानियां है। जिन का 'टीकाकरण' करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। इतिहास की गाथाएं बच्चों को बताएंगी कि कठोर परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती। कठोर परिश्रम के बाद भी सफलता तब मिलती है जब माता पिता का आशीर्वाद हो। कवि ने दो ही पंक्तियों में खेती के प्रतिकों के सहारे कितना कुछ कह दिया है। वही किसान अच्छी फसल प्राप्त कर सकता है। जो अच्छी फसल प्राप्त करने कि योग्यता रखता हो। वही माता पिता बच्चों को संस्कारी बना सकते हैं। जो पहले खुद संस्कारी बनते हैं।
महेश सोनी
(गुजराती लेखक मंडल के मुखपत्र लेखक अने लेखन में कुछ वर्ष पहले छपा मेरा लेख)

रविवार, अप्रैल 26

स्वस्थ जीवन के सूत्र(अनुदित)


(बुजुर्गों के लिये)

अनुवादक - कुमार अहमदाबादी 


डॉ. हिदेकी वाडा 61 वर्ष के हैं, वैज्ञानिक हैं। ये विशेष रुप से वृद्धों के मानसिक रोगों के विशेषज्ञ हैं। इन्हों ने अभी “द 80-यर ओल्ड वॉल” नाम का पुस्तक प्रकाशित किया है। किताब की अब तक 500,000 कॉपियां बिक चुकी है। आशा है 1 मिलियन तक बिक जाएगी। 


डॉ.वाडा के 44 जीवन मंत्र यहां लिखए हैं। जो पढ़ने और साझा(शेयर) करने लायक हैं: विशेष रुप से आप के प्रिय वृद्धजनों के साथ:



1. प्रति दिन चलिये, धीमी गति से ही सही पर चलिये 

    2.जब आप दुःखी हों या गुस्से में हों तब गहरा श्वास लिजीए। इस से मन को शांति मिलेगी।

3. हल्का फुल्का व्यायाम कीजिए उस से शरीर कठोर बनेगा।

4. गर्मियों में अगर एयरकंडीशनर का उपयोग करते हों तो उचित मात्रा में पानी पीजिए।

5. आवश्यक हो तो डायपर पहनने में शरम मत कीजिएगा। वो शरीर के हलन चलन(बोडी मूवमेंट) को सरल बनाता है।

6. भोजन को अच्छी तरह चबाइये। इस से भोजन पचने में सरल होगा एवं मस्तिष्क व तन को सक्रिय रखेगा।

   7.भूलने की आदत उम्र के कारण होती, बल्कि मस्तिष्क के कम उपयोग के कारण होती है।

8. ये आवश्यक नहीं है।प्रत्येक समस्या का उपचार दवाओं से नहीं हो।

9. रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और मधुमेह(सुगर) को जबरन कम करने की जरुरत नहीं है।

10. अकेला होना एकलता नहीं होती। वो आराम का समय हो सकता है।

11.थकान लगी हो तो शरीर में आलस फैलना स्वाभाविक है।

12.सुरक्षित तरीके से वाहन न चला सको तो वाहन चलाना छोड़ दो।

13.चाहे जो कीजिए, मंगल वो न कीजिए जिस से तनाव उत्पन्न हो। उसे टालिये

14. आयु बढने के बावजूद कुदरती इच्छाएं रहती है।

15. घर पर बैठे मत रहिये। तरोताजा हवा के संपर्क में रहिये, बाहर की दुनिया देखिये।

16. जिस की इच्छा हो वो खाइये। लेकिन मर्यादित मात्रा में खाइये।

17. प्रत्येक कार्य बिना कोई जल्दबाजी सावधानी पूर्वक कीजिए।

18.जो लोग आप को अस्वस्थ करते हैं। उन से दूर रहिये।

19.टीवी न मोबाइल को कम समय दीजिए। 

20.कभी बीमारी से साथ समझौता कर लेना अच्छा होता है।

21.“हमेशा रास्ता होता है” – ये विचार व्यक्ति में शक्ति व उर्जा का संचार करता है।

22.ताजे फळ व सब्ज़ियां खानी जरुरी है

23.ज्यादा देर नहाना जरुरी नहीं है। नहाने के लिये १० मिनिट काफी हैं।

24.नींद न आये तो जबरदस्ती मत लीजिए।

25.जो आप को खुश करता हो वो मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।

26.मन में कुछ भी मत रखिये, जो कहना हो कर दीजिए।

27.विश्वास पात्र फैमिली डॉक्टर के संपर्क में रहिये।

28.हमेशा समर्पण करने की जरुरत नहीं। कभी “खराब माता पिता” बनना भी जरुरी है।

29.विचार बदलते हों, परिवर्तित होते हों तो फिक्र की कोई बात नहीं।

30.वृद्धावस्था में डिमेन्शिया (भूलने की आदत) कभी कभी शांति मिलने या प्राप्त करने का जरिया बन जाती है।

31.सीखना बंद करोगे तो तेजी से वृद्ध बनोगे।

32.मान सम्मान के पीछे दौड़ने की कोई जरुरत नहीं है। जो मिला हो उसी से संतोष कीजिए।

33. माता-पिता का मन व भाव हमेशा निर्दोष होते हैं। ये उन का विशेषाधिकार है

34.जीवन की कठिन परिस्थितियां ही जीवन को रोचक व रसिक बनाती है। मसालेदार भी बनाती है।

35.सूर्यप्रकास में बैठने से उर्जा मिलती है।

36.दूसरों के लिये सकारात्मक कार्य करने से हमें भी सकारात्मक फल मिलता है।

37.प्रत्येक दिन शांति व मस्ती से जिएं।

38.इच्छाओं का होना इंसान के जीवंत होने का प्रमाण है।

39.हमेशा सकारात्मक सोच रखिये। सकारात्मक विचार कीजिये।

40.आराम से सांस लें। अब जीवन में ज्यादा दौड़-धूप करनेकी जरुरत नहीं।

41.आप को जीवन कैसे जीना है। ये आप तय कीजिए। 

42.जो होता है उस का शांति से स्वीकार कीजिये।

43.खुशमिजाज व मस्त मौले लोग सब को अच्छे लगते हैं।

44.एक मुस्कान को अनेक आशिर्वाद मिलते हैं।


कृपा कर के इस संदेश को अपने माता-पिता एवं बडों के साथ साझा(शेयर) कीजिए।


क्यों कि वे खुशी से, शांति से अच्छा स्वास्थ्य पूर्ण जीवन जी सके।🌿🙂




हमेशा स्वस्थ रहिये 🙏🏻💪☕

मंगलवार, अप्रैल 21

स्त्रियों की कार्य क्षमता (अनुदित)


लेखक – पी पी राठोड़ (सुरत)

अनुवादक – कुमार अहमदाबादी 


क्या कभी इस विषय पर कोई सर्वेक्षण हुआ है। स्त्रियों के पास कितनी बौद्धिक क्षमता होती है?🤔😊😊😊👌👌👍👍


भारत के प्रत्येक घर में सुबह, दोपहर, शाम, सप्ताह के सातों दिन भोजन बनाया जाता है। रोटी, सब्जी, दाल चावल, विभिन्न चटनीयां, मिठाइयां, नमकीन भांति भांति के पकवान बनते हैं। 

क्या कभी इस मुद्दे पर अभ्यास हुआ है? ये सब बनाने वाली स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा कितनी और कैसी होती है। 🤔


सच तो ये है। एसा कोई यंत्र कुदरत ने भी नहीं बनाया है। जो स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा को नाप सके। इन की बौद्धिक प्रतिभा इतनी विशाल, गहरी और सूक्ष्म होती है। उसे मापने की क्षमता इंसान में नहीं है।  


🍲✨ रसोईघर सिर्फ बर्तनों का भंडार नहीं होता। 

वो एक प्रयोगशाला होता है। 

छौंकते समय तेल कितना चाहिये? राई सब तड तड बोलेगी? हल्दी कब डालनी है?

 वो एक रासायणिक प्रयोगशाला होता है।


छौंकते समय कितना तेल चाहिये? हल्दी व मिर्च मसाले कितने चाहिये? 


— ये गणित की कला है! ➗✨

गैस की आंच कब धीमी रखनी है? कौन सी बानगी में कडछा व कौन सी में चिपिया लेना है। कब कढ़ाई का और कब भगौने का उपयोग करना है? सबकुछ स्वयं स्फुरित होता है।


— ये physics! तापमान का खेल है 🔥⚙️


स्त्री ये कैसे मालूम करती है। भोजन पक गया है?



— ये आब्जर्वेशन की चरम सीमा पर 

पहुंची कुशलता के कारण होता है।👀👌


एक साथ चार बानगियां बनाना और वो भी तय समय पर!


— ये वही कर सकता है जो मैनेजमेंट माहिर हो। 🕒💼

दूध उबल रहा हो, कुकर की सीटी की टाईमींग, तेल का तापमान, चाय ठंडी न हो जाने का ध्यान रखना…..


— ये सब multitasking की पराकाष्ठा होती है। 🤯👏

मीठा, तीखा… सिर्फ चपटी से जान लेना!

ये तो इनबिल्ट AI है।😄🔥


भोजन या खाद्य सामग्री ऋतु के अनुसार कितने दिन टिकेगी का अंदाज लगाना……


ये सिर्फ अनुभव नहीं होता है। इस का अपना विज्ञान है।


💛 रसोई बनाना सिर्फ कौशल्य नहीं है।

वो प्रेम, जिम्मेदारी और समर्पण भाव तीनों का परिपूर्ण संगम है।


शिक्षित न हों तो भी और 

डिग्री न हों तो भी

अंग्रेजी न आती हो तो भी 


रसोईघर को संचालित करने वाली स्त्री किसी मैनेजर से कम नहीं होती।

 🙌👑💯


🌼 एक दिन निष्पक्ष भाव से देखना…

अपने बनाए भोजन तरफ व घर की स्त्री की तरफ–

आप को मालूम होगा। रोज इस कला के लिये कितना कौशल्य, त्याग व समर्पण भाव का उपयोग होता है।

रोज का त्याग रोज चमत्कार करता है✨🙏

हमें रोज तीन बार ताजा, गरम, स्वादिष्ट *भोजन* कैसे मिलता है। 

🍛❤️

भोजन से पहले एक बार कुदरत द्वारा मिली। इस *रसोई की देवी* *अन्नपूर्णा* को मन की गहराईयों से धन्यवाद कहिये।

🙏

स्त्री में जो बुद्धि चातुर्य, सहनशीलता व प्रेम व समर्पण की ताकत है। उसे किसी पाठ्य पुस्तक या पाठ्य

क्रम से सीखा नहीं जा सकता। 💐❤️✨ 💛

—-पी पी राठोड़ (सुरत)

गुरुवार, अप्रैल 9

परमात्मा का आभार मानने के लिये दस अदभुत कारण


अनुदित

अनुवादक -महेश सोनी 


वाहन चलाते समय टायर घिस जाते हैं। जब की जीवनभर दौडने के बाद भी आप के पैर के तलवे नये जैसे रहते हैं।

शरीर में ७५% पानी होता है। लाखों छिद्र होने के बावजूद एक बूंद पानी शरीर में से लीक नहीं होता है।

सहारे के बिना कुछ भी टिकता नहीं, स्थिर नहीं रहता। लेकिन शरीर अपना संतुलन बनाकर रखता है।

बैटरी कोई भी हो चार्ज किए बिना चलती या टिकती नही है। जब की हृदय जन्म से मृत्यु तक लगातार धडकता रहता है।

कोई भी पंप हमेशा नहीं चलता। लेकिन रक्त पूरी जिंदगी लगातार बहता रहता है।

विश्व के बढ़िया से बढ़िया कैमरों की भी मर्यादा होती है। लेकिन आंख हजारों मेगा पिक्सल के प्रत्येक दृश्य को देख सकती है। उस का विश्लेषण कर सकती है। 

कोई भी लेबोरेट्री स्वाद का परीक्षण नहीं कर सकती। जीभ किसी भी साधन के बिना अनेकों स्वाद को पहचान लेती है।

सब से आधुनिक सेन्सर भी मर्यादित है। त्वचा सूक्ष्म से सूक्ष्म संवेदना का अनुभव कर सकती है।

कोई भी साधन प्रत्येक आवाज को उत्पन्न नहीं कर सकता। लेकिन गला हजारों फ्रीक्वेंसी के आवाज उत्पन्न कर सकता है।

कोई भी उपकरण आवाजों को पूर्ण रुप से डिकोड नही कर सकता। लेकिन कान प्रत्येक आवाज को समझते हैं; और अर्थ घटन भी करते हैं।

*ईश्वर ने हमें जो जो अनमोल सुविधाएं दी है। उस के लिये उस का आभार मानिये।*

और

*हमें कोई अधिकार नहीं है हम परमात्मा को शिकायत करें।*


*रोज सुबह उठना अपने आप में एक चमत्कार है!*



*इन सब के लिये सर्वशक्तिमान परमात्मा को धन्यवाद कहो*


🙏🏻

सोमवार, मार्च 23

पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा

 

🙏 पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा🙏

अनुवादक - महेश सोनी 


मैं प्रतिज्ञाबद्ध रहूंगा,

हमारे लिये एवं हम सब की

भावि पीढीयों के लिये…

मैं दंतमंजन एवं दाढी करते समय पानी का उपयोग उसे टमलर में भरकर करुंगा। नल को खुल्ला नहीं छोडूंगा।

मैं भोजन करते समय जूठन नहीं छोडूंगा; अन्य किसी भी तरह अन्न का बिगाड़ नहीं करुंगा।

मैं लेखन कार्य करते समय कागज के दोनों तरफ लिखूंगा। कागज का व्यवस्थित उपयोग करुंगा।

मैं यहां वहां जहां तहां कूडा कर्कट नहीं फेकूंगा।

मैं जो उपयोगी न हो उन डिवाइस एवं चार्जर की स्विच तुरंत बंद कर दूंगा।

मैं AC, RO या वॉशिंग मशीन में से निकलने वाले पानी का दुबारा उपयोग करुंगा।

मैं नहाने के लिये फव्वारे के उपयोग ना कर के बाल्टी और टमलर का उपयोग करुंगा।

मैं जब भी घर से बाहर निकलूंगा; मेरे साथ वस्त्रों की एक बैग लेकर निकलूंगा।

मैं आज ही एक पौधा लगाउंगा; एवं पूरे मन से उस का जतन करुंगा।

मैं जब भी बाहर जाउंगा; पानी की बोतल अपने साथ रखूंगा।

मैं मेरे वाहनों की सफाई करने में पानी का उपयोग नही। करुंगा। कपड़े से उस की साफ सफाई करुंगा। ज्याद हुआ तो गीले कपडे से उसे साफ करुंगा।

मैं दूध का पाउच या अन्य कोई भी प्लास्टिक पाउच काटते समय ये ध्यान रखूंगा। कटने वाला टुकडा एकदम ही न कट जाये। कुछ हिस्सा जुडा रहे ताकि उस टुकडे के रुप में थोडा या प्लास्टिक भी उधर उधर बिखरने की संभावना समाप्त हो जाए।

मैं प्रयास करुंगा। प्लास्टिक के पैकेट में पैक नाश्ता ना करुं।

मैं प्रयास करुंगा। सूर्य प्रकाश और हवा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करुं। इस के लिये खिड़कियां व दरवाजों को खुल्ले रखूंगा। 

मैं पक्षियों के लिये अपने आंगन या छत पर पानी से भरा बर्तन रखूंगा। उन के चुग्गे के लिये कुछ न कुछ अवश्य रखूंगा।

मैं नजदीक की किसी जगह जाना हो तो पैदल जाउंगा या सायकल का उपयोग करुंगा।

मैं बिना मतलब बल्ब, ट्यूब लाइट, पंखे या चार्जर की स्विच ऑन नहीं रखूंगा।

मैं जब जरुरत न हो तब…विशेष रुप से रात के मेरे मोबाइल डेटा और वाई फाई को बंद कर दूंगा।

जब मेरा वाहन चौराहे पर खडा होगा और मुझे सूचित करने वाले ट्राफिक सिग्नल के हरा होने में बीस(२०) से ज्यादा सेकंड से ज्यादा का समय होगा; तब मेरे वाहन का इंजन बंद कर दूंगा। 

मैं वातानुकूलक(एयरकंडीशनर) का उपयोग कम करुंगा। जब उस का उपयोग करुंगा। तब उस का तापमान २४(चौबीस) से २६(छब्बीस) तक ही सीमित रखूंगा।

मैं उपयोग करो और फेंक दो(यूज एंड थ्रो) वाले साधनों का उपयोग नहीं करुंगा। एसे साधनो का उपयोग करुंगा। जिस का उपयोग एक से ज्यादा बार(रियूसेबल) किया जा सके। 

मैं अखबार, गत्ते व उन के खाली डिब्बे, दूध की खाली थेलियां, ७५ माइक्रोन थैली, डिब्बियां…. जैसी पुर्न उपयोगी (रिसायक्लेबल) चीजों को कूडेदान में ना फेंककर उन्हें कबाडी को दे दूंगा।

मैं आज से ही कम से कम एक बाल्टी पानी बचाने का प्रयास करुंगा।

मैं परिवार के विशेष दिनों जैसे कि जन्म दिवस पर अन्य महत्वपूर्ण दिवसों पर एक पौधा लगाने का प्रयास करुंगा।

मैं वॉशिंग मशीन की क्षमता जितने मैले कपडे इकट्ठे होने पर ही उस का उपयोग करुंगा।

मैं मेरे घर में आने वाले रैपर/ एक बार उपयोगी प्लास्टिक का इकोब्रिक बनाउंगा।

मैं पर्यावरण को बचाने के लिये अथक प्रयास करुंगा।

मैं इस मैसेज को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाउंगा। 

मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक खाली बोतल रखूंगा। उसे उसी समय कूड़ेदान में फेकूंगा।जब वो गैरजरूरी प्लास्टिक एवं अन्य कूडे से पूरा भर जाएगाी।

मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक और खाली बोतल रखूंगा। उस में फलों व सब्जियों के बीज इकट्ठे करुंगा। उन बीजों को किसी किसान या अन्य उचित व्यक्ति तक पहुंचाऊंगा। जिस के उन का उचित व सही उपयोग हो सके।

मैं भोजन बनाते समय व भोजन करते समय कम से कम बर्तनों का उपयोग करुंगा; ताकि उन्हें मांजते समय कम पानी का उपयोग हो।



 👌*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि*👌

🙏जय श्री कृष्णा 🙏

रविवार, मार्च 15

આપણી ૧૪૮ જાતોનું વર્ણન


કોપી પેસ્ટ


બ્રાહ્મણની રસોઈ ને રાજપૂતની રીત,

વાણિયાનો વેપાર ને પારસીની પ્રીત,


નાગરની મુત્સદી ને વ્યાસની ભવાઈ,

લોહાણાની હુંસાતુંસી ને ભાટિયાની ભલાઈ,


આયરની રખાવટ ને ચારણની ચતુરાઈ,

મેમણની મક્કારી ને સૈયદની લુચ્ચાઈ,


કણબીની ખેતી ને સંધીની ઉઘરાણી,

પઠાણનું વ્યાજ ને ઘાંચીની ઘાણી,


મેરનો રોટલો ને પૂજારીનો થાળ,

કોળીની કરકસર ને ભક્તોની માળ,


વહિવંચાની બિરદાવળી ને ઢાઢીનાં વખાણ,

ભાટની કવિતા ને માણભટ્ટની માણ,


મણિયારાની ચૂડલી ને વાંઝાનો વણાટ,

ખવાસની ચાકરી ને ખત્રીનો રંગાટ,


સીદ્દીઓનો મસીરો ને કાગદીની શાઈ,

ખોજાના ડાળિયા ને કંદોઈની મિઠાઈ,


ચુંવાળિયાનું પગેરૂં ને વાઘેરની કરડાઈ,

આડોડિયાની ઝડઝપટ ને તરકની તોછડાઈ,


અબોટીનાં કીર્તન ને બદાણિયાની ઠેક,

સોમપુરાના મંદિરો ને ઘંટિયાની ખેપ,


સરૈયાનો સુરમો ને સુતારનું ઘડતર,

મોચીનાં પગરખાં ને કડિયાનું ચણતર,


વોરાની નમ્રતા ને વાળંદનો જવાબ,

પસાયતાનો ખુંખારો ને દરવાણીનો રૂવાબ,


ખારવાનું વહાણવટું ને લોધીની જાળ,

દરજીનો ટાંકો ટેભો ને પ્રજાપતિનો ચોફાળ,


નાડીયાનું ગાડાનારણ ને કાયસ્થની કલમ,

વૈદ્યનું પડીકું ને ગંજેરીની ચલમ,


રામાનંદીની આરતી ને મુલ્લાની બાંગ,

ભોઈનું રાંધણું ને ભરવાડોની ડાંગ,


સિપાઈનો સાફો ને નટડાનો દોર,

કાશીના પંડિતો ને તીરથના ગોર,


વાળંદની હજામત ને ચામઠાની શાન,

લુહારિયાની અટાપટી ને ડફેરનું નિશાન,


કબ્બાડીની કુહાડી ને ભીલનું તીર,

શીખની ઉતાવળ ને ધૂળધોયાની ધીર,


માધવિયાની કે’ણી ને ભવાયાનો ભાગ,

ઢાઢીની રામલીલા ને ધૂતારાનો લાગ,


મતવાનું મૈયારૂં ને રાંકાની રાબ,

ભીખારીની ઝોળી ને માળીની છાબ,


નાથનો રાવણહથ્થો ને ભાંડના ગાલ,

ચોરટાની શિયાળી ને તસ્કરનો ખ્યાલ,


મલ્લની કુસ્તિ ને બહુરૂપીનો વેશ,

જાદૂગરની ચાલાકી ને માલધારીનો નેસ,


ભોપાનો ભભકો ને રબારીની પુંજ,

ભરથરીનું ખપ્પર ને શેતાનની સૂઝ,


પ્રશ્નોરાનું વૈદું ને નાઘોરીનો નાતો,

સાધુનું સદાવ્રત ને કસાઈનો કાતો,


લંઘાના ત્રાસાં ને તૂરીનું રવાજ,

કામળિયાના કાંસિયા ને ડબગરનું પખાજ,


રખેહરનો ઢોલ ને મીરની શરણાઈ,

મારગીનો તંબૂરો ને ધોબીની ધોલાઈ,


જંગમનો ટોકરો ને રાવળનું ડાક,

વાદીની મોરલી ને બારવટિયાની ધાક,


લંઘીના રાજિયા ને યોગીની મોજ,

જત્તીનો ત્યાગ ને ફિરંગીની ફોજ,


વાંસફોડાના વાંસ ને હિજડાની તાળી,

ગોકળીનો ગોફણિયો ને રાજૈયાની થાળી,


સલાટની ઘંટી ને પીંજારાની તળાઈ,

સંઘાડિયાનો ઢોલિયો ને મજૂરની કમાઈ,


સંન્યાસીનું મુંડન ને જોગીની ધૂણી,

ફકીરની કદુવા ને શરાફીની મૂડી,


લુહારની ધમણ ને ગાંધર્વનું ગાણું,

જૈનોના ઉપવાસ ને સુરતીનું ખાણું,


મેઘવાળની મજૂરી ને ઘાંચીની ધાર,

દાડીયાની દાતરડી ને ખાણીયાનો ડાર,


માજોઠીનું ગધેડું ને ચુનારનો ભઠ્ઠો,

જતની સાંઢડી ને વણઝારાની પોઠયો,


ઘેડિયાની ટીપણી ને પઢોરાના રાસ,

કલાલનો દારૂ ને કઠિયારાનો કાંસ,


થોરોની ઈંઢોણી ને ચમારનો કુંડ,

સ્વામિનારાયણનો ચાંદલો ને અતિતનું ત્રિપુંડ,


મુંડાનો વાંદરો ને દેવીપૂજકની વઢવેડ,

વેરીયાની કરવત ને હિજરતની હેલ્ય...


              

~ કવિ પિંગળશીભાઈ મેઘાણંદ ગઢવી. 🙏👍🙏 

शुक्रवार, मार्च 13

प्रधानमंत्री को खुला पत्र(अनुदित)

प्रधानमंत्री को खुला पत्र..

अनुवादक - महेश सोनी 


ये संदेश हिन्दूजा अस्पताल के भूतपूर्व सीईओ श्री प्रमोद लेले का है। 



 आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,

हम इतने लायक नहीं है। जिन्हें आप जैसे कुशल प्रधानमंत्री मिलें।

देश के ज्यादातर लोग आप के कार्यों की प्रशंसा करते नहीं है।


आप दिन में सोलह घंटे काम करते हैं।

आप रात्रि को उडान भरकर दिन में दूसरे देशों की मुलाकात लेकर समय बचाते हैं। …

किन्तु ये कायर और मानसिक रुप से अस्वस्थ लोग आप के बलिदान की कदर कभी नहीं करेंगे।


एक परिवार को साठ(60) वर्षों के लिये सौंपनेवाले लोग आप को पांच वर्ष तक शांति से शासन करने नहीं देंगे।


ये देश झूठे देशभक्त, झूठी ख्याति और आलसी मनोवृत्ति रखनेवाले लोगों का है।

एसे लोग अपेक्षा रखते हैं। ये देश मुझे सबकुछ देगा। 

मगर मैं देश के लिये कुछ नहीं करुंगा।


-मुझे चौबीस घंटे पानी चाहिये; लेकिन मैं एक भी वृक्ष नहीं लगाउंगा।


मझे की बात ये कि वे आप से आशा करेंगे। आप वृक्ष लगाएं। 


वे अपने चार व्यक्तियों के परिवार को सही तरह से संभाल नहीं पा रहे हैं, सही तरीके से घर नहीं चला सकते। लेकिन आप को सलाह देंगे। देश को सही तरीके से कैसे चलाया जाता है।

है ना मजे की बात…..!


ये कोई भूत नहीं, मगर एक भूत आप से बदला लेना चाहता है।

आपने जैसे प्रधानमंत्री बनकर विश्व का सब से बडा अपराध किया है।


वे वापस घर लौटना नहीं चाहते एवं धर्म परिवर्तन को प्रतिबंधित करनेवाला कानून भी नहीं चाहते।


दादरी की घटना में भीड जुट गयी। परंतु देश के लिये बलिदान देने वाले संतोष महाडिक के पीस कोई नहीं आया।


जब गौहत्या कानूनन प्रतिबंधित होती है; तब खुल्लम खुल्ला बीफ पार्टियों का आयोजन होता है। ये वो लोग है जो अहिंसा का विरोध करते हैं। 


आतंकवादी को फांसी देने का विरोध करनेवाले देशद्रोही कन्हैया को समर्थन दिया जाता है।

वे आप का नाम लेकर आप का अपमान करते हैं।

वे असहिष्णुता के बहाने से पुरस्कार वापस करते हैं।

परंतु निर्भया हत्या केस। २६/११ जैसी विस्फोटक घटनाएं होने पर मुंह पर ताले लगा लेते हैं।

जो लोग एसे हैं। उन का प्रतिनिधित्व करनेवाले कैसे होंगे। 

आप देश के लिये ढेर सारा काम करते हैं; मगर एसे लोग आप को देशभक्ति का पाठ पढाते हैं।



अदभुत!

-सत्य यै है की उन लोगों से ये सहन नहीं हो रहा है। आप प्रधानमंत्री बन गये हैं।

- वे अपेक्षा रखते हैं; मेरे घर के सामने पडा कूडा म्युनिसिपल कोर्पोरेशन मेरे फोन किये बिना अपने आप ले जाएगा।

- उन की बमबारी के कारण पूरा देश विनाश की ओर आगे बढ़ रहा है।

- उन को ये हकीकत हजम नहीं हो रही है। देश मजबूत हो रहा है। देश प्रगति कर रहा है...🇮🇳


मगर नहीं……

वे अरहर दाल १₹ प्रति किलो और प्याज मुफ्त का चाहते हैं।

आप भ्रष्टाचार खत्म कीजिये। एसे लोग सकारात्मक परिवर्तन चाहते ही नहीं है।

मुफ्त का खाने का चस्का जो लग गया है। 

हमारा इतिहास साक्षी है…

कोई भी व्यक्ति स्वयं नहीं बदलेगा। मगर ये अवश्य चाहेगा। देश बदलना चाहिये।


५०००० ₹ के स्मार्टफोन का उपयोग करेंगे।


३जी, ४जी, ५ज४ के पैकेज का उपयोग करेंगे।

-लेकिन कहेंगे “मोदी की सरकार बेकार है। महंगाई कितनी बढ़ गयी है”


-२९९₹ का ३जी पैकेज आवश्यक है। अरहर दाल और प्याज मुफ्त में चाहिये।

-जो रास्ते में कहीं भी थुकते हैंं; जल का नल खुला छोड देते हैं। कहीं खुला नल दिखे तो बंध नहीं करते। चौराहे पर ट्राफिक सिग्नलों की अनदेखी करते हैं। वे पूछते हैं, अच्छे दिन कब आएंगे?



●●● *साहब* हमारे लोग एसे ही हैं।●●●


● आप विश्व के १० विख्यात और प्रतिभाशाली व्यक्तियों में से एक हो। लेकिन उन को इस से कोई मतलब नहीं है।


● आयु के इस पडाव पर आप को आराम करना चाहिए। लेकिन आप सोलह(१६) घंटे कार्य करते हैं। नौजवानों को काम करना चाहिए।‌ लेकिन वे आराम करते हुए देश बदलने की कल्पना करते हैं।



● आप के काम का आप के बलिदान का यहां कोई मूल्य नहीं है।

आप का व्यक्तित्व एसा है। आप विश्व का नेतृत्व करेंगे।


●मगर इस देश के लोग उस का मूल्यांकन नहीं करेंगे।

मोदी जी, आप के लिये मेरे मन में अंदर था है व रहेगा..🚩



● कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगेगा। 

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।


समय बताएगा कौन वैचारिक गरीब व 

कौन अमीर था।

दुर्भाग्यवश आधे या उस से ज्यादा लोग इसे फॉरवर्ड भी नहीं करेंगे 😔




संस्कार सिंचन

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