लेखक – पी पी राठोड़ (सुरत)
अनुवादक – कुमार अहमदाबादी
क्या कभी इस विषय पर कोई सर्वेक्षण हुआ है। स्त्रियों के पास कितनी बौद्धिक क्षमता होती है?🤔😊😊😊👌👌👍👍
भारत के प्रत्येक घर में सुबह, दोपहर, शाम, सप्ताह के सातों दिन भोजन बनाया जाता है। रोटी, सब्जी, दाल चावल, विभिन्न चटनीयां, मिठाइयां, नमकीन भांति भांति के पकवान बनते हैं।
क्या कभी इस मुद्दे पर अभ्यास हुआ है? ये सब बनाने वाली स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा कितनी और कैसी होती है। 🤔
सच तो ये है। एसा कोई यंत्र कुदरत ने भी नहीं बनाया है। जो स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा को नाप सके। इन की बौद्धिक प्रतिभा इतनी विशाल, गहरी और सूक्ष्म होती है। उसे मापने की क्षमता इंसान में नहीं है।
🍲✨ रसोईघर सिर्फ बर्तनों का भंडार नहीं होता।
वो एक प्रयोगशाला होता है।
छौंकते समय तेल कितना चाहिये? राई सब तड तड बोलेगी? हल्दी कब डालनी है?
वो एक रासायणिक प्रयोगशाला होता है।
छौंकते समय कितना तेल चाहिये? हल्दी व मिर्च मसाले कितने चाहिये?
— ये गणित की कला है! ➗✨
गैस की आंच कब धीमी रखनी है? कौन सी बानगी में कडछा व कौन सी में चिपिया लेना है। कब कढ़ाई का और कब भगौने का उपयोग करना है? सबकुछ स्वयं स्फुरित होता है।
— ये physics! तापमान का खेल है 🔥⚙️
स्त्री ये कैसे मालूम करती है। भोजन पक गया है?
— ये आब्जर्वेशन की चरम सीमा पर
पहुंची कुशलता के कारण होता है।👀👌
एक साथ चार बानगियां बनाना और वो भी तय समय पर!
— ये वही कर सकता है जो मैनेजमेंट माहिर हो। 🕒💼
दूध उबल रहा हो, कुकर की सीटी की टाईमींग, तेल का तापमान, चाय ठंडी न हो जाने का ध्यान रखना…..
— ये सब multitasking की पराकाष्ठा होती है। 🤯👏
मीठा, तीखा… सिर्फ चपटी से जान लेना!
ये तो इनबिल्ट AI है।😄🔥
भोजन या खाद्य सामग्री ऋतु के अनुसार कितने दिन टिकेगी का अंदाज लगाना……
ये सिर्फ अनुभव नहीं होता है। इस का अपना विज्ञान है।
💛 रसोई बनाना सिर्फ कौशल्य नहीं है।
वो प्रेम, जिम्मेदारी और समर्पण भाव तीनों का परिपूर्ण संगम है।
शिक्षित न हों तो भी और
डिग्री न हों तो भी
अंग्रेजी न आती हो तो भी
रसोईघर को संचालित करने वाली स्त्री किसी मैनेजर से कम नहीं होती।
🙌👑💯
🌼 एक दिन निष्पक्ष भाव से देखना…
अपने बनाए भोजन तरफ व घर की स्त्री की तरफ–
आप को मालूम होगा। रोज इस कला के लिये कितना कौशल्य, त्याग व समर्पण भाव का उपयोग होता है।
रोज का त्याग रोज चमत्कार करता है✨🙏
हमें रोज तीन बार ताजा, गरम, स्वादिष्ट *भोजन* कैसे मिलता है।
🍛❤️
भोजन से पहले एक बार कुदरत द्वारा मिली। इस *रसोई की देवी* *अन्नपूर्णा* को मन की गहराईयों से धन्यवाद कहिये।
🙏
स्त्री में जो बुद्धि चातुर्य, सहनशीलता व प्रेम व समर्पण की ताकत है। उसे किसी पाठ्य पुस्तक या पाठ्य
क्रम से सीखा नहीं जा सकता। 💐❤️✨ 💛
—-पी पी राठोड़ (सुरत)