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सोमवार, मार्च 23

पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा

 

🙏 पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा🙏

अनुवादक - महेश सोनी 


मैं प्रतिज्ञाबद्ध रहूंगा,

हमारे लिये एवं हम सब की

भावि पीढीयों के लिये…

मैं दंतमंजन एवं दाढी करते समय पानी का उपयोग उसे टमलर में भरकर करुंगा। नल को खुल्ला नहीं छोडूंगा।

मैं भोजन करते समय जूठन नहीं छोडूंगा; अन्य किसी भी तरह अन्न का बिगाड़ नहीं करुंगा।

मैं लेखन कार्य करते समय कागज के दोनों तरफ लिखूंगा। कागज का व्यवस्थित उपयोग करुंगा।

मैं यहां वहां जहां तहां कूडा कर्कट नहीं फेकूंगा।

मैं जो उपयोगी न हो उन डिवाइस एवं चार्जर की स्विच तुरंत बंद कर दूंगा।

मैं AC, RO या वॉशिंग मशीन में से निकलने वाले पानी का दुबारा उपयोग करुंगा।

मैं नहाने के लिये फव्वारे के उपयोग ना कर के बाल्टी और टमलर का उपयोग करुंगा।

मैं जब भी घर से बाहर निकलूंगा; मेरे साथ वस्त्रों की एक बैग लेकर निकलूंगा।

मैं आज ही एक पौधा लगाउंगा; एवं पूरे मन से उस का जतन करुंगा।

मैं जब भी बाहर जाउंगा; पानी की बोतल अपने साथ रखूंगा।

मैं मेरे वाहनों की सफाई करने में पानी का उपयोग नही। करुंगा। कपड़े से उस की साफ सफाई करुंगा। ज्याद हुआ तो गीले कपडे से उसे साफ करुंगा।

मैं दूध का पाउच या अन्य कोई भी प्लास्टिक पाउच काटते समय ये ध्यान रखूंगा। कटने वाला टुकडा एकदम ही न कट जाये। कुछ हिस्सा जुडा रहे ताकि उस टुकडे के रुप में थोडा या प्लास्टिक भी उधर उधर बिखरने की संभावना समाप्त हो जाए।

मैं प्रयास करुंगा। प्लास्टिक के पैकेट में पैक नाश्ता ना करुं।

मैं प्रयास करुंगा। सूर्य प्रकाश और हवा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करुं। इस के लिये खिड़कियां व दरवाजों को खुल्ले रखूंगा। 

मैं पक्षियों के लिये अपने आंगन या छत पर पानी से भरा बर्तन रखूंगा। उन के चुग्गे के लिये कुछ न कुछ अवश्य रखूंगा।

मैं नजदीक की किसी जगह जाना हो तो पैदल जाउंगा या सायकल का उपयोग करुंगा।

मैं बिना मतलब बल्ब, ट्यूब लाइट, पंखे या चार्जर की स्विच ऑन नहीं रखूंगा।

मैं जब जरुरत न हो तब…विशेष रुप से रात के मेरे मोबाइल डेटा और वाई फाई को बंद कर दूंगा।

जब मेरा वाहन चौराहे पर खडा होगा और मुझे सूचित करने वाले ट्राफिक सिग्नल के हरा होने में बीस(२०) से ज्यादा सेकंड से ज्यादा का समय होगा; तब मेरे वाहन का इंजन बंद कर दूंगा। 

मैं वातानुकूलक(एयरकंडीशनर) का उपयोग कम करुंगा। जब उस का उपयोग करुंगा। तब उस का तापमान २४(चौबीस) से २६(छब्बीस) तक ही सीमित रखूंगा।

मैं उपयोग करो और फेंक दो(यूज एंड थ्रो) वाले साधनों का उपयोग नहीं करुंगा। एसे साधनो का उपयोग करुंगा। जिस का उपयोग एक से ज्यादा बार(रियूसेबल) किया जा सके। 

मैं अखबार, गत्ते व उन के खाली डिब्बे, दूध की खाली थेलियां, ७५ माइक्रोन थैली, डिब्बियां…. जैसी पुर्न उपयोगी (रिसायक्लेबल) चीजों को कूडेदान में ना फेंककर उन्हें कबाडी को दे दूंगा।

मैं आज से ही कम से कम एक बाल्टी पानी बचाने का प्रयास करुंगा।

मैं परिवार के विशेष दिनों जैसे कि जन्म दिवस पर अन्य महत्वपूर्ण दिवसों पर एक पौधा लगाने का प्रयास करुंगा।

मैं वॉशिंग मशीन की क्षमता जितने मैले कपडे इकट्ठे होने पर ही उस का उपयोग करुंगा।

मैं मेरे घर में आने वाले रैपर/ एक बार उपयोगी प्लास्टिक का इकोब्रिक बनाउंगा।

मैं पर्यावरण को बचाने के लिये अथक प्रयास करुंगा।

मैं इस मैसेज को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाउंगा। 

मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक खाली बोतल रखूंगा। उसे उसी समय कूड़ेदान में फेकूंगा।जब वो गैरजरूरी प्लास्टिक एवं अन्य कूडे से पूरा भर जाएगाी।

मैं मेरे रसोईघर के प्लेटफार्म पर एक और खाली बोतल रखूंगा। उस में फलों व सब्जियों के बीज इकट्ठे करुंगा। उन बीजों को किसी किसान या अन्य उचित व्यक्ति तक पहुंचाऊंगा। जिस के उन का उचित व सही उपयोग हो सके।

मैं भोजन बनाते समय व भोजन करते समय कम से कम बर्तनों का उपयोग करुंगा; ताकि उन्हें मांजते समय कम पानी का उपयोग हो।



 👌*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि*👌

🙏जय श्री कृष्णा 🙏

रविवार, मार्च 15

આપણી ૧૪૮ જાતોનું વર્ણન


કોપી પેસ્ટ


બ્રાહ્મણની રસોઈ ને રાજપૂતની રીત,

વાણિયાનો વેપાર ને પારસીની પ્રીત,


નાગરની મુત્સદી ને વ્યાસની ભવાઈ,

લોહાણાની હુંસાતુંસી ને ભાટિયાની ભલાઈ,


આયરની રખાવટ ને ચારણની ચતુરાઈ,

મેમણની મક્કારી ને સૈયદની લુચ્ચાઈ,


કણબીની ખેતી ને સંધીની ઉઘરાણી,

પઠાણનું વ્યાજ ને ઘાંચીની ઘાણી,


મેરનો રોટલો ને પૂજારીનો થાળ,

કોળીની કરકસર ને ભક્તોની માળ,


વહિવંચાની બિરદાવળી ને ઢાઢીનાં વખાણ,

ભાટની કવિતા ને માણભટ્ટની માણ,


મણિયારાની ચૂડલી ને વાંઝાનો વણાટ,

ખવાસની ચાકરી ને ખત્રીનો રંગાટ,


સીદ્દીઓનો મસીરો ને કાગદીની શાઈ,

ખોજાના ડાળિયા ને કંદોઈની મિઠાઈ,


ચુંવાળિયાનું પગેરૂં ને વાઘેરની કરડાઈ,

આડોડિયાની ઝડઝપટ ને તરકની તોછડાઈ,


અબોટીનાં કીર્તન ને બદાણિયાની ઠેક,

સોમપુરાના મંદિરો ને ઘંટિયાની ખેપ,


સરૈયાનો સુરમો ને સુતારનું ઘડતર,

મોચીનાં પગરખાં ને કડિયાનું ચણતર,


વોરાની નમ્રતા ને વાળંદનો જવાબ,

પસાયતાનો ખુંખારો ને દરવાણીનો રૂવાબ,


ખારવાનું વહાણવટું ને લોધીની જાળ,

દરજીનો ટાંકો ટેભો ને પ્રજાપતિનો ચોફાળ,


નાડીયાનું ગાડાનારણ ને કાયસ્થની કલમ,

વૈદ્યનું પડીકું ને ગંજેરીની ચલમ,


રામાનંદીની આરતી ને મુલ્લાની બાંગ,

ભોઈનું રાંધણું ને ભરવાડોની ડાંગ,


સિપાઈનો સાફો ને નટડાનો દોર,

કાશીના પંડિતો ને તીરથના ગોર,


વાળંદની હજામત ને ચામઠાની શાન,

લુહારિયાની અટાપટી ને ડફેરનું નિશાન,


કબ્બાડીની કુહાડી ને ભીલનું તીર,

શીખની ઉતાવળ ને ધૂળધોયાની ધીર,


માધવિયાની કે’ણી ને ભવાયાનો ભાગ,

ઢાઢીની રામલીલા ને ધૂતારાનો લાગ,


મતવાનું મૈયારૂં ને રાંકાની રાબ,

ભીખારીની ઝોળી ને માળીની છાબ,


નાથનો રાવણહથ્થો ને ભાંડના ગાલ,

ચોરટાની શિયાળી ને તસ્કરનો ખ્યાલ,


મલ્લની કુસ્તિ ને બહુરૂપીનો વેશ,

જાદૂગરની ચાલાકી ને માલધારીનો નેસ,


ભોપાનો ભભકો ને રબારીની પુંજ,

ભરથરીનું ખપ્પર ને શેતાનની સૂઝ,


પ્રશ્નોરાનું વૈદું ને નાઘોરીનો નાતો,

સાધુનું સદાવ્રત ને કસાઈનો કાતો,


લંઘાના ત્રાસાં ને તૂરીનું રવાજ,

કામળિયાના કાંસિયા ને ડબગરનું પખાજ,


રખેહરનો ઢોલ ને મીરની શરણાઈ,

મારગીનો તંબૂરો ને ધોબીની ધોલાઈ,


જંગમનો ટોકરો ને રાવળનું ડાક,

વાદીની મોરલી ને બારવટિયાની ધાક,


લંઘીના રાજિયા ને યોગીની મોજ,

જત્તીનો ત્યાગ ને ફિરંગીની ફોજ,


વાંસફોડાના વાંસ ને હિજડાની તાળી,

ગોકળીનો ગોફણિયો ને રાજૈયાની થાળી,


સલાટની ઘંટી ને પીંજારાની તળાઈ,

સંઘાડિયાનો ઢોલિયો ને મજૂરની કમાઈ,


સંન્યાસીનું મુંડન ને જોગીની ધૂણી,

ફકીરની કદુવા ને શરાફીની મૂડી,


લુહારની ધમણ ને ગાંધર્વનું ગાણું,

જૈનોના ઉપવાસ ને સુરતીનું ખાણું,


મેઘવાળની મજૂરી ને ઘાંચીની ધાર,

દાડીયાની દાતરડી ને ખાણીયાનો ડાર,


માજોઠીનું ગધેડું ને ચુનારનો ભઠ્ઠો,

જતની સાંઢડી ને વણઝારાની પોઠયો,


ઘેડિયાની ટીપણી ને પઢોરાના રાસ,

કલાલનો દારૂ ને કઠિયારાનો કાંસ,


થોરોની ઈંઢોણી ને ચમારનો કુંડ,

સ્વામિનારાયણનો ચાંદલો ને અતિતનું ત્રિપુંડ,


મુંડાનો વાંદરો ને દેવીપૂજકની વઢવેડ,

વેરીયાની કરવત ને હિજરતની હેલ્ય...


              

~ કવિ પિંગળશીભાઈ મેઘાણંદ ગઢવી. 🙏👍🙏 

शुक्रवार, मार्च 13

प्रधानमंत्री को खुला पत्र(अनुदित)

प्रधानमंत्री को खुला पत्र..

अनुवादक - महेश सोनी 


ये संदेश हिन्दूजा अस्पताल के भूतपूर्व सीईओ श्री प्रमोद लेले का है। 



 आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,

हम इतने लायक नहीं है। जिन्हें आप जैसे कुशल प्रधानमंत्री मिलें।

देश के ज्यादातर लोग आप के कार्यों की प्रशंसा करते नहीं है।


आप दिन में सोलह घंटे काम करते हैं।

आप रात्रि को उडान भरकर दिन में दूसरे देशों की मुलाकात लेकर समय बचाते हैं। …

किन्तु ये कायर और मानसिक रुप से अस्वस्थ लोग आप के बलिदान की कदर कभी नहीं करेंगे।


एक परिवार को साठ(60) वर्षों के लिये सौंपनेवाले लोग आप को पांच वर्ष तक शांति से शासन करने नहीं देंगे।


ये देश झूठे देशभक्त, झूठी ख्याति और आलसी मनोवृत्ति रखनेवाले लोगों का है।

एसे लोग अपेक्षा रखते हैं। ये देश मुझे सबकुछ देगा। 

मगर मैं देश के लिये कुछ नहीं करुंगा।


-मुझे चौबीस घंटे पानी चाहिये; लेकिन मैं एक भी वृक्ष नहीं लगाउंगा।


मझे की बात ये कि वे आप से आशा करेंगे। आप वृक्ष लगाएं। 


वे अपने चार व्यक्तियों के परिवार को सही तरह से संभाल नहीं पा रहे हैं, सही तरीके से घर नहीं चला सकते। लेकिन आप को सलाह देंगे। देश को सही तरीके से कैसे चलाया जाता है।

है ना मजे की बात…..!


ये कोई भूत नहीं, मगर एक भूत आप से बदला लेना चाहता है।

आपने जैसे प्रधानमंत्री बनकर विश्व का सब से बडा अपराध किया है।


वे वापस घर लौटना नहीं चाहते एवं धर्म परिवर्तन को प्रतिबंधित करनेवाला कानून भी नहीं चाहते।


दादरी की घटना में भीड जुट गयी। परंतु देश के लिये बलिदान देने वाले संतोष महाडिक के पीस कोई नहीं आया।


जब गौहत्या कानूनन प्रतिबंधित होती है; तब खुल्लम खुल्ला बीफ पार्टियों का आयोजन होता है। ये वो लोग है जो अहिंसा का विरोध करते हैं। 


आतंकवादी को फांसी देने का विरोध करनेवाले देशद्रोही कन्हैया को समर्थन दिया जाता है।

वे आप का नाम लेकर आप का अपमान करते हैं।

वे असहिष्णुता के बहाने से पुरस्कार वापस करते हैं।

परंतु निर्भया हत्या केस। २६/११ जैसी विस्फोटक घटनाएं होने पर मुंह पर ताले लगा लेते हैं।

जो लोग एसे हैं। उन का प्रतिनिधित्व करनेवाले कैसे होंगे। 

आप देश के लिये ढेर सारा काम करते हैं; मगर एसे लोग आप को देशभक्ति का पाठ पढाते हैं।



अदभुत!

-सत्य यै है की उन लोगों से ये सहन नहीं हो रहा है। आप प्रधानमंत्री बन गये हैं।

- वे अपेक्षा रखते हैं; मेरे घर के सामने पडा कूडा म्युनिसिपल कोर्पोरेशन मेरे फोन किये बिना अपने आप ले जाएगा।

- उन की बमबारी के कारण पूरा देश विनाश की ओर आगे बढ़ रहा है।

- उन को ये हकीकत हजम नहीं हो रही है। देश मजबूत हो रहा है। देश प्रगति कर रहा है...🇮🇳


मगर नहीं……

वे अरहर दाल १₹ प्रति किलो और प्याज मुफ्त का चाहते हैं।

आप भ्रष्टाचार खत्म कीजिये। एसे लोग सकारात्मक परिवर्तन चाहते ही नहीं है।

मुफ्त का खाने का चस्का जो लग गया है। 

हमारा इतिहास साक्षी है…

कोई भी व्यक्ति स्वयं नहीं बदलेगा। मगर ये अवश्य चाहेगा। देश बदलना चाहिये।


५०००० ₹ के स्मार्टफोन का उपयोग करेंगे।


३जी, ४जी, ५ज४ के पैकेज का उपयोग करेंगे।

-लेकिन कहेंगे “मोदी की सरकार बेकार है। महंगाई कितनी बढ़ गयी है”


-२९९₹ का ३जी पैकेज आवश्यक है। अरहर दाल और प्याज मुफ्त में चाहिये।

-जो रास्ते में कहीं भी थुकते हैंं; जल का नल खुला छोड देते हैं। कहीं खुला नल दिखे तो बंध नहीं करते। चौराहे पर ट्राफिक सिग्नलों की अनदेखी करते हैं। वे पूछते हैं, अच्छे दिन कब आएंगे?



●●● *साहब* हमारे लोग एसे ही हैं।●●●


● आप विश्व के १० विख्यात और प्रतिभाशाली व्यक्तियों में से एक हो। लेकिन उन को इस से कोई मतलब नहीं है।


● आयु के इस पडाव पर आप को आराम करना चाहिए। लेकिन आप सोलह(१६) घंटे कार्य करते हैं। नौजवानों को काम करना चाहिए।‌ लेकिन वे आराम करते हुए देश बदलने की कल्पना करते हैं।



● आप के काम का आप के बलिदान का यहां कोई मूल्य नहीं है।

आप का व्यक्तित्व एसा है। आप विश्व का नेतृत्व करेंगे।


●मगर इस देश के लोग उस का मूल्यांकन नहीं करेंगे।

मोदी जी, आप के लिये मेरे मन में अंदर था है व रहेगा..🚩



● कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगेगा। 

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।


समय बताएगा कौन वैचारिक गरीब व 

कौन अमीर था।

दुर्भाग्यवश आधे या उस से ज्यादा लोग इसे फॉरवर्ड भी नहीं करेंगे 😔




शुक्रवार, मार्च 6

भारत का मस्तक ऊंचा था है और रहेगा(अनुदित)


(अनुदित)

अनुवादक - महेश सोनी 


शाहरुख खान दुबई को अपना दूसरा घर बताता है। भाई क क क क क किरन दुबई के बुर्ज खलिफा के नजदीक एक बंकर में अटक गयी है।‌ 

विराट और अनुष्का ने दुबई में एक कैंटी लीवर बिल्डिंग के रुफ टॉप पर डिनर की लक्जरी रील शूट की है। 

वहां से निकलने के लिये लंबी कतार लगी थी। एफ वाय आई

सैफ और सारा ने कहा दुबई “एकदम नया लग रहा है”


जी हां,

एकदम नया

बंकर और अन्य उपकरणों के कारण 

दीपीका और रणवीर अबुधाबी का ब्रांड एम्बेसडर की तरह प्रचार कर रहे थे।

साफ सुथरा वातावरण

शुद्ध हवा


वे कह रहे थे ये पारिवारिक स्थान है। पूरे परिवार के साथ यहां समय बीता सकते हैं।

वे नहीं जानते थे वो पारिवारिक स्थान मिसाइलों के दायरे में है।

यस द्वीप के लिये ऋतिक, फरहान, अभय देओल संगठित होकर प्रचार कर रहे थे।

वे कह रहे थे “जिंदगी को यस बोल” 


अब फिलहाल वहां जिंदगी स्थगित है।

कृपया थोडी देर बाद प्रयास करें


और हमारा “बौद्धिक” वर्ग? 


वो ये सब देख रहा है और सिर हिला रहा है।

“देखिये, ये सभ्यता है

जो प्रगति कर रही है”


भारत की हवा विष के समान है। 

भारत की सडकें टूटी हुई हैं। 

दुबई में स्वतंत्रता है।

यूरोप संस्कृति को जीता है।


आज दुबई धुआं धुआं हो रहा है।

यूरोप की अर्थव्यवस्था बैसाखी के सहारे है।

यूएस एक टूटे खिलौने सा है। जो अपने सहयोगीयों के सहारे चमक रहा है।


मगर भारत?

भारत ऊबाऊ है


ये बहुत कष्टदायक है

कोई मिसाइल नहीं चल रही


कोई बाहर नहीं भाग रहा

और तो और उच्च स्तरीय नागरिक भी नहीं है 

भारत बहुत उबाऊ, शांत रणनीतीवाला देश है


मेरे मन में एक सरल प्रश्न घूम रहा है


वे कहां है?


वे लिंक्ड इन दार्शनिक 

चुनिंदा अवसरों के देशभक्त 

पूर्व जनरल जो हवा में मुक्के चलाते हैं

“मोदी पुतीन के गले क्यों लगे?”


"मोदी ने बेन्जामिन नेतन्याहू को भाई क्यों कहा"

“मोदी रशिया से तेल क्यों ले रहे हैं”

"हमारी विदेश नीति दिशाहीन हो गयी है"

"भारत के तन में रीढ में हड्डी नहीं है"


कहां है ये लोग?

 देश जानना चाहता है 

क्षमा करना अर्नब


माईक हाथ में लो और बताओ 


हमें लेक्चर पिलाओ


भारत सब से वार्ता कर रहा है

रशिया 

यूएस

इसराइल

इरान

खाडी के देश

यूरोप 

अरे तालिबान तक


वे इसे समझौता करना कहते हैं 

हम इसे विकल्प खुले रखना कहते हैं 


जब मध्य पूर्व जलने लगा

भारत ने परदे के पीछे वाले संपर्कों को सक्रिय किया 


जब यूरोप लहूलुहान होने लगा

भारत के पास व्यापारिक रास्ता था


जब अमरीका साथियों को दबाने लगा

भारत ने अपना चुन लिया 

इसलिए नहीं की हम भाग्यवान हैं


इसलिए की कोई है जिस की सोच बहुत ज्यादा दूरदर्शी है

उस की सोच लोगों से दस कदम आगे है 

उस की सोच तब भी सक्रिय थी जब हमारे सितारे अलग अलग तरह की रील्स बनाने में व्यस्त थे


जो लोग भारत की विदेश नीती की आलोचना कर रहे थे वे अब चुपचाप अपने ओआईसी कार्ड की वैधता की जांच पड़ताल में लगे है। 

  वो आवाजें जो कह रही थी “भारत अब रहने लायक नहीं रहा है” 

वो भारत में लौटकर शांति से जीना चाहते हैं।


भारत एक मात्र एसी सभ्यता है जहां सुख शांति चैन व सुरक्षा व सुकून है

जहां रक्तपात नहीं है


ये सब संभव हुआ, क्यों?

क्यों कि यहां 

"समझौतावादी" "रीढ की हड्डी बिना की" “वोट चोर” कूटनीति है। कुछ लोग कुछ राजनीतिक पक्ष हमेशा जिस की खिल्ली उड़ाते रहे हैं।


तो हां,

मैं उन्हें देखना चाहता हूं 

इर्षा या द्वेष भावना से नहीं

बल्कि दस्तावेजों के दृष्टिकोण से


क्यों कि, 

इतिहास हमेशा अपने आप को दोहराता है


इतिहास दुबारा भी लिखा जाता है 

लेकिन कभी-कभी गलत लोग इतिहास लिख देते हैं; हालांकि इस बार एसा नहीं होगा।

भारत मस्तक उंचा कर के खडा है और सब देख रहा है 

बुधवार, फ़रवरी 25

आयु का खेल


आयु का खेल

अनुवादक - महेश सोनी 


*“1 ₹ के 6 गोलगप्पे”* से *“30 ₹ के 6 गोलगप्पे होने तक हम बड़े हो गये। 

*“मैदान में आजा”*

और 



*“ऑनलाईन आजा”*

के बीच 

हम बडे हुए हैं।

        

*“होटल में खाने की इच्छा”*

एवं 

*“घर में खाने की इच्छा”*

के बीच हम बड़े हो गये।


*“बहन की पारले की चॉकलेट चुराने”*


और

*“बहन के लिये सिल्क लाने तक”*

हम बडे हो गये।

  

*“मम्मी, बस पांच मिनिट और सोने दे”*    

और

*“snooze बटन दबाने के बीच हम सब बडे हो गये। ये हमें मालूम ही नहीं हुआ।

 


*“टूटी हुई पेन्सिल”*


       

*“टूटे हुए मन”* के बीच हम बड़े हो गये।


*“मैं बडा होना चाहता हूं।”* 

और 

             

*“मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूं"* 

के बीच हम बडे गये।


*“चलिये, मिलकर आयोजन करें”*

से

*“चलिये मिलकर कुछ आयोजन करते हैं”*

इन दो OK के बीच हम बडे हो गये।

   

आखिर में           

*“किसी की तोंद निकल आयी है तो किसी के बाल झड़ गये हैं"*


*“आयु के हमारे साथ खेल कर गयी”*... 



*सब के* 

*क्या सपने थे* 

*और सब क्या बन गये हैं....*

*परिस्थिति अनुसार* 

*सब ने अपने अपने रास्ते चुन लिये हैं..!* 

मंगलवार, फ़रवरी 24

समाज सभ्य हो गया है (अनुदित)

 

अनुवादक - महेश सोनी 

✳️ समय पुराना था ✳️

लोगों के पास तन ढकने के लिये वस्त्र नहीं थे; लेकिन वे तन ढकने का प्रयास करते थे।

आज वस्त्रों के भंडार भरे पडे हैं लेकिन तन का प्रदर्शन करने के प्रयास करते हैं। 

समाज बहुत “सभ्य” हो गया है, है ना!



✳️ समय पुराना था ✳️

आवागमन के साधन मर्यादित थे; लेकिन लोग रिश्तेदारों से मिलने जाते थे। 

आज बेशुमार साधन है लेकिन लोग न मिलने के लिये बहाने बनाते हैं।

समाज बहुत सभ्य” हो गया है, है ना! 


✳️ समय पुराना था ✳️

एक घर की बेटी को पूरा गांव अपनी बेटी मानता था।

आज बेटी पड़ोसी के घर जाए तो भी मन डरता है।

समाज बहुत “सभ्य” हो गया है, है ना! 


✳️ समय पुराना था ✳️

लोग अपने इलाके के बुजुर्गों को हालचाल पूछ लेते थे।

आज लोग स्वयं अपने माता पिता को ही वृद्धाश्रम में भेज देते हैं।

समाज बहुत सभ्य हो गया है, है ना!




✳️ समय पुराना था ✳️

खिलौने सीमीत मात्रा में थे। इलाके के बच्चे साथ मिल जुलकर खेलते थे। आज बच्चे मोबाइल में कैद हो गये हैं।

समाज बहुत “सभ्य” हो गया है,‌ है ना!


✳️ समय पुराना था ✳️

गली के पशुओं को भी रोटी दी जाती थी। गाय और कुत्ते के लिये घर में दो रोटी हमेशा बनती थी।

आज पड़ोसी के बच्चे भूखे सो जाते हैं।

तब मानवता रोने लगती है।

समाज बहुत सभ्य हो गया है।



✳️ समय पुराना था ✳️

लोग पड़ोसी के घर आये मेहमान का हालचाल पूछते थे।

आज पड़ोसी का नाम तक नहीं जानते।

समाज बहुत सभ्य हो गया है 



👌 वाह रे आधुनिक और सभ्य समाज👌

रविवार, फ़रवरी 22

ढलती आयु में थकान (अनुदित)


अनुवादक - महेश सोनी 


🧡 ढल रही संध्या के समय‌ आकाश का सौंदर्य अपने शिखर पर होता है।

तो फिर….

हमें ढल रही आयु की थकान क्यों लगती है…?🧡


🧡 अधूरे सपने पूरे करने की आशा इसी दौर में जगती है तो फिर हमें ढल रही आयु की थकान क्यों लगती है?


🧡 जिम्मेदारीयों से मुक्त होकर स्वयं से मिलने की प्यास जगती है

तो फिर…….

हमें ढल रही आयु की थकान क्यों लगती है…….? 🧡


🧡 अंधियारी रात को,

पूनम के चांद की रोशनी कितना रोशन कर रही है।

आयु के इस पड़ाव पर जिंदगी के अनुभवों से समझ का एक एहसास जगता है।

तो फिर……

हमें ढल रही आयु की थकान क्यों लगती है 


🧡 सुख दुःख दोनों जीवन के सनातन व अकाट्य सत्य है।🧡

उन्हें एक बार एक किनारे पर रखकर जिंदगी को जीकर देखो….

फिर देखिएगा 





🧡 ज़िंदगी कितनी विशेष लगती है।….....!!!

🧡तन का थक जाना नियती है…

मगर,‌ मन से मत थकना 

दोस्त….

फिर देख लेना.....…

ढलती आयु की

 थकान लगती भी है या नहीं..🧡



 

पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा

  🙏 पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा🙏 अनुवादक - महेश सोनी  मैं प्रतिज्ञाबद्ध रहूंगा, हमारे लिये एवं हम सब की भावि पीढीयों के लिये… मैं दंतमंजन ए...