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शुक्रवार, जनवरी 11

अमावस्या की चाँदनी

रोशनी के बिना रोशनी हो गई
है अमावस्या पर चाँदनी हो गई
कुमार अहमदाबादी


 सोमरस
सोमरस गर पीना ही है तो पीयो शान से
साथ दो कहना ये प्रिया से या बुद्धिमान से
बेतहाशा पी के तुम जग में तमाशा ना बनो
कम पीयो छुपकर भी ताकि जी सको सम्मान से

खैयाम की रूबाई का शून्य पालनपुरी द्वारा किये गये अनुवाद का अनुवाद
कुमार अहमदाबादी


 पी गया
सूर्य को प्याले में घोलकर पी गया
रोशनी के नशे में जीवन जी गया
रोशनी को पचाना नहीं था सरल
कामयाबीयों को भूलकर जी गया
कुमार अहमदाबादी

संघर्ष 
 मेट्रो का संघर्ष रोटी के लिए नहीं
कार पीसी फोन, लक्जरी के लिए है
कुमार अहमदाबादी

अंतर
मैं उठता हूँ तब तुम सोते हो
यु ए से भारत में अंतर है
कुमार अहमदाबादी


सजावट
क्या क्या कुदरत ने आँचल में छुपाया है
कितनी खूबी से आँचल को सजाया है
कुमार अहमदाबादी


 दंभ
बात हिन्दुस्तान की करते हैं
जोधपुर नागौर में अटके हैँ
कुमार अहमदाबादी







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