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सोमवार, मई 27

छलकने का नजारा (गज़ल)


गज़ल

खूब  होता है छलकने का नजारा 

आंख से छमछम बरसने का नजारा 


ले लगा ले घूंट दो फिर देख प्यारे 

आज प्यासों के बहकने का नजारा 


क्या बताऊं यार कितना खूबसूरत 

था जवानी के भटकने का नजारा 


रोशनी आंखों की बढ जाएगी लाले 

देख चंदा के चमकने का नजारा 


बस गया है आंख में पनघट कुआं औ’

और चंदा के चमकने का नजारा 

कुमार अहमदाबादी


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