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गुरुवार, नवंबर 8

ईतिहास के छाले

ईस शहर में जीने के अंदाज निराले हैं।
होठोँ पे लतीफे हैं आवाज में छाले हैं॥

एक दो राहे पर यहाँ के जीनेवाले हैं।
दिल में राज है और होठोँ पे ताले हैं॥

त्रिशूल और तारा चल रहें चालें हैं।
जुबाँ पे शहद है विचारों में भाले हैं॥

ईस देश की राजनीती के जो साले हैं।
वोट के पक्के हैं शासन में बेताले हैं॥

जिंदादिली से जीते कुछ एसे जियाले हैं।
भरे दिखते पर खाली जिन के प्याले हैं॥

मेरे वतन के सच्चे जो रखवाले हैँ।
मन में लगन हैं पर पड़ गये ठाले हैं॥

'कुमार' ईलाज है? ये ईतिहास के छाले हैं।
कुछ फूट चुके हैं कुछ फूटनेवाले हैं॥
कुमार अहमदाबादी 

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