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बुधवार, फ़रवरी 4

बेटी क्या है? और क्या नहीं?

 

बेटी क्या है? और क्या नहीं?🌹


🌞 सूरज के घर बेटी होती व उसे विदा करने की घडी आयी होती तो सूर्य को पता चलता की अंधकार किसे कहा जाता है ?……

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✍ “बेटी” क्या होती है?"

🌹““बे”” - 👉 हृदय के साथ जुडी अटूट सांस…….

🌹““टि”” - 👉 कस्तूरी के समान हमेशा सुगंधित 

🌹 ""यां"" - 👉 रिद्धि - सिद्धि लानेवाली एवं परिवार को रोशन करने वाली एक परी….🖌🌹❣


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🌹 किसी भी परिवार में पिता को भोजन कराने का अधिकार 

सिर्फ और सिर्फ एक बेटी के पास होता है।

🌹 प्रत्येक बेटी सब से ज्यादा प्रेम अपने पिता से करती है।

🌹 बेटी जानती है। समग्र विश्व में यही एक एसा पुरुष है। जो कभी उसे दुःखी नहीं करेगा।


🌹बेटी दाम्पत्य का दीपक

एक बार एक चर्चा के दौरान एक मित्र ने कहा 


🌹“मैं मेरी पत्नी से ज्यादा प्रेम मेरी बेटी से करता हूं।


🌹आज भी जब भी मैं अस्वस्थ होता हूं तब ससुराल से तुरंत दौडी चली आती है। उस को देखते ही मैं मेरे सारे दुःख भूल जाता हूं।

🌹मुझे लगता है। शायद इसी वजह से उस की बिदाई के पलों में माता से ज्यादा दुःख पिता को होता है।

 🌹 क्यों कि माता रो सकती है, पिता आसानी से रो नहीं सकता।

बेटी के बीस बाईस की होने तक माता पिता को उस के प्रेम की लय लग जाती है। 

🌹 बेटी कभी माँ बन जाती है तो कभी दादी बन जाती है। कभी मित्र बन जाती है।


🌹सुख के समय बेटी पिता की मुस्कान बन जाती है और 

🌹 दुःख के समय में पिता के आंसू पोंछने वाली हथेली बन जाती है।

देखते ही देखते बेटी बडी हो जाती है। एक दिन लाल जोडे में नववधू बनकर विदा हो जाती है। 


🌹 जाते समय वो पिता के सीने से लगकर सजल नेत्रों से कहती है।

🌹 पापा, मैं जा रही हूं…. आप मेरी तनिक भी चिंता मत करियेगा।

समय समय पर अपनी दवाइयां लेना मत भूलना।



🌹 उस पल पिता द्वारा आंसूओं को रोकने से अनेक प्रयासों के बावजूद वे की सरहद लांघकर गंगा की तरह बह निकलते हैं। 

🌹 कवि कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतल में कण्व ऋषि शकुंतला को विदा करते हुए कहते हैं,

🌹🌹मेरे जैसे संसार का त्याग कर के वनवासी बने व्यक्ति को अगर पुत्री की बिदाई इतनी पीडा दे सकती है तो संसारी व्यक्तिओं की पीडा कितनी गहन होगी?


🌹 मैं एक बार एक शादी में गया था। मित्र की पुत्री की शादी थी।

बेटी को विदा करने के पश्चात वो एकदम पस्त होकर बैठे उस मित्र ने 

कहा था : - : 


🌹 आज तक मैंने कभी परमात्मा के सामने प्रार्थना नहीं की है। लेकिन आज मन कर रहा है - हर बेटी के बाप को परमात्मा से ये प्रार्थना करनी ही चाहिये- 

🙏👏 हे परमात्मा, आप संसार के सारे पुरुषों को बहुत समझदार व विवेकशील बनाना; क्यों कि उन्हीं में से कोई एक मेरी पुत्री का पति बनने वाला है।


🌹 संसार की सारी स्त्रियों को ममतामयी बनाना। उन्हीं में से कोई मेरी बेटी की सास या ननद बनने वाली है।


🌹 भगवान, तुम्हें अगर पूरी सृष्टि का पुनः निर्माण करना पडे तो मेरी बेटी के भाग्य में सुख ही सुख लिखना। दुःख नाम का कहीं उल्लेख मत करना।


🌹 कुछ समय पहले ही सेवा निवृत्त हुए एक आचार्य ने एक बात कही थी:

🌹अगर आप के घर में बेटी ना हो तो पिता पुत्री के संबंध की गहराई को आप कभी जान नहीं पाएंगे। 


 🌹आप सिर्फ इतना सा करना।


🌹चाहे जैसी परिस्थितियां हो, चाहे जितने आपसी मनमुटाव हो। लेकिन 


पुत्रवधू को


उस के पिता के बारे में कभी किसी भी प्रकार के कटु वचन मत सुनाना।

अनुवादक - महेश सोनी 


🌹 बेटी भगवान के बारे में कटु वचन सुन सकती है लेकिन अपने पिता के विरुद्ध एक अक्षर नहीं सुन सकती।

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