चार साथी एक बोतल चाहिये
प्लेट में काजू तथा जल चाहिये
ज़िंदगी में रंग भरने के लिये
श्रीमती थोड़ी सी चंचल चाहिये
उच्च स्तर की जब ग़ज़ल लिखनी हो तब
शांत मन में भाव कोमल चाहिये
क्या गज़ब की सोच है मैं क्या कहूं
कोशिशों के बिन तुझे हल चाहिये
जानते हो नृत्य करने के लिये
हो कहीं भी मंच समतल चाहिये
चाहिये ना और कुछ तुम से “कुमार”
प्रेम से परिपूर्ण संबल चाहिये
कुमार अहमदाबादी
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