साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
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गुरुवार, जुलाई 13
सीमा तोड़ दी(रुबाई)
मंगलवार, जुलाई 11
खट्टी मीठी साथी(रुबाई)
कुमार अहमदाबादी
रविवार, जुलाई 9
काटती हो जब सब्जी(रुबाई)
अपने आप में खोयी रहती तो तुम
हर काम सफाई से करती हो तुम
जब काटती हो सब्जी तन्मय होकर
मासूम बहुत सुंदर लगती हो तुम
कुमार अहमदाबादी
शनिवार, जुलाई 8
स्वामिनी खड़ी है(रुबाई)
स्वामी की स्वामिनी खड़ी है छत पर
प्रीतम की भामिनी खड़ी है छत पर
बारिश में भीगने का सोचा तब से
सावन में कामिनी खड़ी है छत पर
कुमार अहमदाबादी
बुधवार, जुलाई 5
वापस लौटो(रुबाई)
भाई मेरे वापस लौटो जल्दी
धारा सीधी अपने घर को चल दी
सच कहता हूं कल के भूले को भी
सत्कारेंगे कुमकुम चावल हल्दी
कुमार अहमदाबादी
मंगलवार, जुलाई 4
सो न सकी (रुबाई )
रविवार, जुलाई 2
अभिलाषा हो तुम(रुबाई)
લેખન માં અલંકાર
અલંકાર (કોપી પેસ્ટ) અલંકાર એટલે :- સાહિત્યમાં વાણીને શોભામાં અને પ્રભાવમાં વધારો કરે તેવા ભાષાકીય રૂપોનો જે પ્રયોજન કરવામાં આવે છે તેને અલંક...
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મારું નામ મહેશ સોની છે. હું ગુજરાતીમાં અભણ અમદાવાદી અને હિન્દીમાં કુમાર અહમદાબાદીના નામથી ગઝલો,કાવ્યો, લેખો, વગેરે લખું છું. મારા પિતાએ ૫૦ન...
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अनुवादक - महेश सोनी विश्व स्वास्थ्य संगठन की ये रिपोर्ट चौंकाने वाली है। दुनिया में प्रत्येक छट्ठा व्यक्ति अकेला है। दुनिया में करोड़ों लो...
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खो चुका जो वो सुहाना था बताती है मुझे याद की खुशबू पहाड़ों से बुलाती है मुझे शिल्पकारी से सजे सुंदर शिकारे खो गये पीर अपनों से बि...
