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रविवार, अप्रैल 26

स्वस्थ जीवन के सूत्र(अनुदित)


(बुजुर्गों के लिये)

अनुवादक - कुमार अहमदाबादी 


डॉ. हिदेकी वाडा 61 वर्ष के हैं, वैज्ञानिक हैं। ये विशेष रुप से वृद्धों के मानसिक रोगों के विशेषज्ञ हैं। इन्हों ने अभी “द 80-यर ओल्ड वॉल” नाम का पुस्तक प्रकाशित किया है। किताब की अब तक 500,000 कॉपियां बिक चुकी है। आशा है 1 मिलियन तक बिक जाएगी। 


डॉ.वाडा के 44 जीवन मंत्र यहां लिखए हैं। जो पढ़ने और साझा(शेयर) करने लायक हैं: विशेष रुप से आप के प्रिय वृद्धजनों के साथ:



1. प्रति दिन चलिये, धीमी गति से ही सही पर चलिये 

    2.जब आप दुःखी हों या गुस्से में हों तब गहरा श्वास लिजीए। इस से मन को शांति मिलेगी।

3. हल्का फुल्का व्यायाम कीजिए उस से शरीर कठोर बनेगा।

4. गर्मियों में अगर एयरकंडीशनर का उपयोग करते हों तो उचित मात्रा में पानी पीजिए।

5. आवश्यक हो तो डायपर पहनने में शरम मत कीजिएगा। वो शरीर के हलन चलन(बोडी मूवमेंट) को सरल बनाता है।

6. भोजन को अच्छी तरह चबाइये। इस से भोजन पचने में सरल होगा एवं मस्तिष्क व तन को सक्रिय रखेगा।

   7.भूलने की आदत उम्र के कारण होती, बल्कि मस्तिष्क के कम उपयोग के कारण होती है।

8. ये आवश्यक नहीं है।प्रत्येक समस्या का उपचार दवाओं से नहीं हो।

9. रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और मधुमेह(सुगर) को जबरन कम करने की जरुरत नहीं है।

10. अकेला होना एकलता नहीं होती। वो आराम का समय हो सकता है।

11.थकान लगी हो तो शरीर में आलस फैलना स्वाभाविक है।

12.सुरक्षित तरीके से वाहन न चला सको तो वाहन चलाना छोड़ दो।

13.चाहे जो कीजिए, मंगल वो न कीजिए जिस से तनाव उत्पन्न हो। उसे टालिये

14. आयु बढने के बावजूद कुदरती इच्छाएं रहती है।

15. घर पर बैठे मत रहिये। तरोताजा हवा के संपर्क में रहिये, बाहर की दुनिया देखिये।

16. जिस की इच्छा हो वो खाइये। लेकिन मर्यादित मात्रा में खाइये।

17. प्रत्येक कार्य बिना कोई जल्दबाजी सावधानी पूर्वक कीजिए।

18.जो लोग आप को अस्वस्थ करते हैं। उन से दूर रहिये।

19.टीवी न मोबाइल को कम समय दीजिए। 

20.कभी बीमारी से साथ समझौता कर लेना अच्छा होता है।

21.“हमेशा रास्ता होता है” – ये विचार व्यक्ति में शक्ति व उर्जा का संचार करता है।

22.ताजे फळ व सब्ज़ियां खानी जरुरी है

23.ज्यादा देर नहाना जरुरी नहीं है। नहाने के लिये १० मिनिट काफी हैं।

24.नींद न आये तो जबरदस्ती मत लीजिए।

25.जो आप को खुश करता हो वो मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।

26.मन में कुछ भी मत रखिये, जो कहना हो कर दीजिए।

27.विश्वास पात्र फैमिली डॉक्टर के संपर्क में रहिये।

28.हमेशा समर्पण करने की जरुरत नहीं। कभी “खराब माता पिता” बनना भी जरुरी है।

29.विचार बदलते हों, परिवर्तित होते हों तो फिक्र की कोई बात नहीं।

30.वृद्धावस्था में डिमेन्शिया (भूलने की आदत) कभी कभी शांति मिलने या प्राप्त करने का जरिया बन जाती है।

31.सीखना बंद करोगे तो तेजी से वृद्ध बनोगे।

32.मान सम्मान के पीछे दौड़ने की कोई जरुरत नहीं है। जो मिला हो उसी से संतोष कीजिए।

33. माता-पिता का मन व भाव हमेशा निर्दोष होते हैं। ये उन का विशेषाधिकार है

34.जीवन की कठिन परिस्थितियां ही जीवन को रोचक व रसिक बनाती है। मसालेदार भी बनाती है।

35.सूर्यप्रकास में बैठने से उर्जा मिलती है।

36.दूसरों के लिये सकारात्मक कार्य करने से हमें भी सकारात्मक फल मिलता है।

37.प्रत्येक दिन शांति व मस्ती से जिएं।

38.इच्छाओं का होना इंसान के जीवंत होने का प्रमाण है।

39.हमेशा सकारात्मक सोच रखिये। सकारात्मक विचार कीजिये।

40.आराम से सांस लें। अब जीवन में ज्यादा दौड़-धूप करनेकी जरुरत नहीं।

41.आप को जीवन कैसे जीना है। ये आप तय कीजिए। 

42.जो होता है उस का शांति से स्वीकार कीजिये।

43.खुशमिजाज व मस्त मौले लोग सब को अच्छे लगते हैं।

44.एक मुस्कान को अनेक आशिर्वाद मिलते हैं।


कृपा कर के इस संदेश को अपने माता-पिता एवं बडों के साथ साझा(शेयर) कीजिए।


क्यों कि वे खुशी से, शांति से अच्छा स्वास्थ्य पूर्ण जीवन जी सके।🌿🙂




हमेशा स्वस्थ रहिये 🙏🏻💪☕

मंगलवार, अप्रैल 21

स्त्रियों की कार्य क्षमता (अनुदित)


लेखक – पी पी राठोड़ (सुरत)

अनुवादक – कुमार अहमदाबादी 


क्या कभी इस विषय पर कोई सर्वेक्षण हुआ है। स्त्रियों के पास कितनी बौद्धिक क्षमता होती है?🤔😊😊😊👌👌👍👍


भारत के प्रत्येक घर में सुबह, दोपहर, शाम, सप्ताह के सातों दिन भोजन बनाया जाता है। रोटी, सब्जी, दाल चावल, विभिन्न चटनीयां, मिठाइयां, नमकीन भांति भांति के पकवान बनते हैं। 

क्या कभी इस मुद्दे पर अभ्यास हुआ है? ये सब बनाने वाली स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा कितनी और कैसी होती है। 🤔


सच तो ये है। एसा कोई यंत्र कुदरत ने भी नहीं बनाया है। जो स्त्रियों की बौद्धिक प्रतिभा को नाप सके। इन की बौद्धिक प्रतिभा इतनी विशाल, गहरी और सूक्ष्म होती है। उसे मापने की क्षमता इंसान में नहीं है।  


🍲✨ रसोईघर सिर्फ बर्तनों का भंडार नहीं होता। 

वो एक प्रयोगशाला होता है। 

छौंकते समय तेल कितना चाहिये? राई सब तड तड बोलेगी? हल्दी कब डालनी है?

 वो एक रासायणिक प्रयोगशाला होता है।


छौंकते समय कितना तेल चाहिये? हल्दी व मिर्च मसाले कितने चाहिये? 


— ये गणित की कला है! ➗✨

गैस की आंच कब धीमी रखनी है? कौन सी बानगी में कडछा व कौन सी में चिपिया लेना है। कब कढ़ाई का और कब भगौने का उपयोग करना है? सबकुछ स्वयं स्फुरित होता है।


— ये physics! तापमान का खेल है 🔥⚙️


स्त्री ये कैसे मालूम करती है। भोजन पक गया है?



— ये आब्जर्वेशन की चरम सीमा पर 

पहुंची कुशलता के कारण होता है।👀👌


एक साथ चार बानगियां बनाना और वो भी तय समय पर!


— ये वही कर सकता है जो मैनेजमेंट माहिर हो। 🕒💼

दूध उबल रहा हो, कुकर की सीटी की टाईमींग, तेल का तापमान, चाय ठंडी न हो जाने का ध्यान रखना…..


— ये सब multitasking की पराकाष्ठा होती है। 🤯👏

मीठा, तीखा… सिर्फ चपटी से जान लेना!

ये तो इनबिल्ट AI है।😄🔥


भोजन या खाद्य सामग्री ऋतु के अनुसार कितने दिन टिकेगी का अंदाज लगाना……


ये सिर्फ अनुभव नहीं होता है। इस का अपना विज्ञान है।


💛 रसोई बनाना सिर्फ कौशल्य नहीं है।

वो प्रेम, जिम्मेदारी और समर्पण भाव तीनों का परिपूर्ण संगम है।


शिक्षित न हों तो भी और 

डिग्री न हों तो भी

अंग्रेजी न आती हो तो भी 


रसोईघर को संचालित करने वाली स्त्री किसी मैनेजर से कम नहीं होती।

 🙌👑💯


🌼 एक दिन निष्पक्ष भाव से देखना…

अपने बनाए भोजन तरफ व घर की स्त्री की तरफ–

आप को मालूम होगा। रोज इस कला के लिये कितना कौशल्य, त्याग व समर्पण भाव का उपयोग होता है।

रोज का त्याग रोज चमत्कार करता है✨🙏

हमें रोज तीन बार ताजा, गरम, स्वादिष्ट *भोजन* कैसे मिलता है। 

🍛❤️

भोजन से पहले एक बार कुदरत द्वारा मिली। इस *रसोई की देवी* *अन्नपूर्णा* को मन की गहराईयों से धन्यवाद कहिये।

🙏

स्त्री में जो बुद्धि चातुर्य, सहनशीलता व प्रेम व समर्पण की ताकत है। उसे किसी पाठ्य पुस्तक या पाठ्य

क्रम से सीखा नहीं जा सकता। 💐❤️✨ 💛

—-पी पी राठोड़ (सुरत)

गुरुवार, अप्रैल 9

परमात्मा का आभार मानने के लिये दस अदभुत कारण


अनुदित

अनुवादक -महेश सोनी 


वाहन चलाते समय टायर घिस जाते हैं। जब की जीवनभर दौडने के बाद भी आप के पैर के तलवे नये जैसे रहते हैं।

शरीर में ७५% पानी होता है। लाखों छिद्र होने के बावजूद एक बूंद पानी शरीर में से लीक नहीं होता है।

सहारे के बिना कुछ भी टिकता नहीं, स्थिर नहीं रहता। लेकिन शरीर अपना संतुलन बनाकर रखता है।

बैटरी कोई भी हो चार्ज किए बिना चलती या टिकती नही है। जब की हृदय जन्म से मृत्यु तक लगातार धडकता रहता है।

कोई भी पंप हमेशा नहीं चलता। लेकिन रक्त पूरी जिंदगी लगातार बहता रहता है।

विश्व के बढ़िया से बढ़िया कैमरों की भी मर्यादा होती है। लेकिन आंख हजारों मेगा पिक्सल के प्रत्येक दृश्य को देख सकती है। उस का विश्लेषण कर सकती है। 

कोई भी लेबोरेट्री स्वाद का परीक्षण नहीं कर सकती। जीभ किसी भी साधन के बिना अनेकों स्वाद को पहचान लेती है।

सब से आधुनिक सेन्सर भी मर्यादित है। त्वचा सूक्ष्म से सूक्ष्म संवेदना का अनुभव कर सकती है।

कोई भी साधन प्रत्येक आवाज को उत्पन्न नहीं कर सकता। लेकिन गला हजारों फ्रीक्वेंसी के आवाज उत्पन्न कर सकता है।

कोई भी उपकरण आवाजों को पूर्ण रुप से डिकोड नही कर सकता। लेकिन कान प्रत्येक आवाज को समझते हैं; और अर्थ घटन भी करते हैं।

*ईश्वर ने हमें जो जो अनमोल सुविधाएं दी है। उस के लिये उस का आभार मानिये।*

और

*हमें कोई अधिकार नहीं है हम परमात्मा को शिकायत करें।*


*रोज सुबह उठना अपने आप में एक चमत्कार है!*



*इन सब के लिये सर्वशक्तिमान परमात्मा को धन्यवाद कहो*


🙏🏻

संगीत से रोगोपचार

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