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मंगलवार, मई 19

संगीत से रोगोपचार

 MUSIC FOR HEALTH

संगीत द्वारा बहुतसी बीमारियों का उपचार सभंव, चिकित्सा विज्ञान मानता हैं कि प्रतिदिन २० मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनने से बहुत रोगों से बचा जा सकता है। रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं,उसी प्रकार संगीत के सुरो व रागो का संबंध भी किसी ना किसी ग्रह से होता हैं। जातक को जिस ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग, सुर अथवा गीत सुनाये जायें तो जातक शीघ्र स्वस्थ होता हैं| जिन शास्त्रीय रागों का उल्लेख किया है उन रागों मे कोई भी गीत, भजन या वाद्य यंत्र बजाया या सुना जा सकता हैं। (सुर व राग से संबन्धित फिल्मी गीत उदाहरण के लिए)

ध्रुव वैद्य

1. हृदय रोग (cardiac care)

राग दरबारी व राग सारंग से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक है। इनसे संबन्धित गीत हैं :-

* तोरा मन दर्पण कहलाए (काजल),

* राधिके तूने बंसरी चुराई (बेटी बेटे ),

* झनक झनक तोरी बाजे पायलिया ( मेरे हुज़ूर ),

* बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम (साजन),

* जादूगर सइयां छोड़ मोरी (फाल्गुन),

* ओ दुनिया के रखवाले (बैजू बावरा ),

* मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये (मुगले आजम )

2. अनिद्रा (insomania)

राग भैरवी व राग सोहनी सुनना लाभकारी होता है, जिनके प्रमुख गीत हैं :-

* रात भर उनकी याद आती रही (गमन),

* नाचे मन मोरा (कोहिनूर),

* मीठे बोल बोले बोले पायलिया (सितारा),

* तू गंगा की मौज मैं यमुना (बैजु बावरा),

* ऋतु बसंत आई पवन (झनक झनक पायल बाजे),

* सावरे सावरे (अनुराधा),

* चिंगारी कोई भड़के (अमर प्रेम),

* छम छम बजे रे पायलिया (घूँघट ),

* झूमती चली हवा (संगीत सम्राट तानसेन ),

* कुहू कुहू बोले कोयलिया (सुवर्ण सुंदरी )

3. एसिडिटी (acidity)

होने पर राग खमाज सुनने से लाभ मिलता है | इस राग के प्रमुख गीत हैं :-

* ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार (संगीत),

* आयो कहाँ से घनश्याम (बुड्ढा मिल गया),

* छूकर मेरे मन को (याराना),

* कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया (अनुराधा),

* तकदीर का फसाना गाकर किसे सुनाये ( सेहरा ),

* रहते थे कभी जिनके दिल मे (ममता ),

* हमने तुमसे प्यार किया हैं इतना (दूल्हा दुल्हन ),

* तुम कमसिन हो नादां हो (आई मिलन की बेला)

4. दुर्बलता (weakness)

यह शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित है| व्यक्ति कुछ कर पाने मे स्वयं को असमर्थ अनुभव करता है। इस में राग जयजयवंती सुनना या गाना लाभदायक है। इस राग के प्रमुख गीत हैं :-

* मनमोहना बड़े झूठे (सीमा),

* बैरन नींद ना आए (चाचा ज़िंदाबाद),

* मोहब्बत की राहों मे चलना संभलके (उड़न खटोला ),

* साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं (चन्द्रगुप्त ),

* ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती हैं (दिल दिया दर्द लिया ),

* तुम्हें जो भी देख लेगा किसी का ना (बीस साल बाद )

5. स्मरण (memory loss)

जिनका स्मरण क्षीण हो रहा हो, उन्हे राग शिवरंजनी सुनने से लाभ मिलता है | इस राग के प्रमुख गीत है -

* ना किसी की आँख का नूर हूँ (लालकिला),

* मेरे नैना (मेहेबूबा),

* दिल के झरोखे मे तुझको (ब्रह्मचारी),

* ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम (संगम ),

* जीता था जिसके (दिलवाले),

* जाने कहाँ गए वो दिन (मेरा नाम जोकर )

6. रक्त की कमी (animia)

होने पर व्यक्ति का मुख निस्तेज व सूखा सा रहता है। स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन होता है। ऐसे में राग पीलू से संबन्धित गीत सुनें :-

* आज सोचा तो आँसू भर आए (हँसते जख्म), * नदिया किनारे (अभिमान),

* खाली हाथ शाम आई है (इजाजत),

* तेरे बिन सूने नयन हमारे (लता रफी),

* मैंने रंग ली आज चुनरिया (दुल्हन एक रात की),

* मोरे सैयाजी उतरेंगे पार (उड़न खटोला),

7. मनोरोग अथवा अवसाद (psycho or depression)

राग बिहाग व राग मधुवंती सुनना लाभदायक है। इन रागों के प्रमुख गीत है :-

* तुझे देने को मेरे पास कुछ नही (कुदरत नई), * तेरे प्यार मे दिलदार (मेरे महबूब),

* पिया बावरी (खूबसूरत पुरानी),

* दिल जो ना कह सका (भीगी रात),

* तुम तो प्यार हो (सेहरा),

* मेरे सुर और तेरे गीत (गूंज उठी शहनाई ),

* मतवारी नार ठुमक ठुमक चली जाये मोहे (आम्रपाली),

* सखी रे मेरा तन उलझे मन डोले (चित्रलेखा)

8. रक्तचाप (blood pressure)

ऊंचे रक्तचाप मे धीमी गति और निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता है। शास्त्रीय रागों मे राग भूपाली को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता है। -----ऊंचे रक्तचाप मे (high BP)

* चल उडजा रे पंछी कि अब ये देश (भाभी),

* ज्योति कलश छलके (भाभी की चूड़ियाँ ),

* चलो दिलदार चलो (पाकीजा ),

* नीले गगन के तले (हमराज़)

-----निम्न रक्तचाप मे (low BP)

* ओ नींद ना मुझको आए (पोस्ट बॉक्स न. 909),

* बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना (जिस देश मे गंगा बहती हैं ),

* जहां डाल डाल पर ( सिकंदरे आजम ),

* पंख होते तो उड़ आती रे (सेहरा )

9. अस्थमा (asthma)

आस्था तथा भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ राग मालकँस व राग ललित से संबन्धित गीत सुने जा सकते हैं। जिनमें प्रमुख गीत :-

* तू छुपी हैं कहाँ (नवरंग),

* तू है मेरा प्रेम देवता (कल्पना),

* एक शहँशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल (लीडर),

* मन तड़पत हरी दर्शन को आज (बैजू बावरा ), आधा है चंद्रमा ( नवरंग )

10. शिरोवेदना (headache)

राग भैरव सुनना लाभदायक होता है। इस राग के प्रमुख गीत :-

* मोहे भूल गए सावरियाँ (बैजू बावरा),

* राम तेरी गंगा मैली (शीर्षक),

* पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई (तेरी सूरत मेरी आँखें),

* सोलह बरस की बाली उमर को सलाम (एक दूजे के लिए)

शुक्रवार, मई 1

संस्कार सिंचन

 बच्चों में संस्कारोँ का सिंचन

आवणारी पेढ़ीओ लणती रहे
सदविचारो जो तमे वावी सको
सुरेश विराणी
कवि कि सुरेश विराणी कि उपरोक्त पंक्तियाँ गहन अर्थ रखती हैं. पहले गुजराती भाषा के इस शेर का भावार्थ स्पष्ट कर दूँ। शेर का भाव है कि अगर आज बोएंगे तो आनेवाली पीढ़ियां सदविचारों कि फसल को काट सकेगी। अगर भावि पीढ़ियों को संस्कारी बनाना है तो आज से ही कार्य शुरू करना होगा। ये बहुत महत्वपूर्ण विचार है। कवि ने खेती के प्रतिक के सहारे दो पंक्तियों में विशाल व गहन अर्थ रखनेवाली बात कही है। ये तो सब चाहते हैं कि मैं बच्चे में सद्विचारों का सिंचन करूँ। मगर कितने लोग सफल होते हैं? कितने लोग बच्चों में संस्कारों का सिंचन करनेवाली सही प्रक्रिया से गुजरते हैं?
कुछ साल पहले मैंने महाराष्ट्र के एक भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश का वक्तव्य सुना था। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही कि, "पहले माँ बाप बिगड़ते हैं फिर बच्चे बिगड़ते हैं। पहले बीज बिगड़ता है फिर फसल बिगड़ती है,"इस बात के समर्थन में उन्हों ने जो घटना सुनाई वो प्राय हर घर में घटित होती है। जिस से बात न करनी हो ऐसे व्यक्ति का फोन आने पर माता-पिता अक्सर फोन बच्चे के हाथ में पकड़ाकर कहते हैं कि कह दे "पापा घर पर नहीं है या मम्मी घर पर नहीं है" क्या ऐसा कर के माँ बाप बच्चों में गलत संस्कारों के बीज बोने का कार्य नहीं करते हैं? इस तरह की छोटी छोटी कई घटनाओं द्वारा माँ बाप बच्चों में कुसंस्कारों के बीज बोते हैं। जैसे कि "अब की बार मामाजी तुम्हें कुछ कहें तो तुम भी साफ साफ ये कह देना" या खुद कह देते हैं कि "खबरदार जो मेरे बच्चे को कुछ कहा"। कौन सोचता हैं की ऐसा कर के मैं गलत कर रहा हूँ।
बच्चों में संस्कारों एवं सदविचारों का सिंचन करने की प्रक्रिया लम्बी व धैर्य की परीक्षा लेनेवाली प्रक्रिया है। जिस तरह अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए किसान को एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उसी तरह बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए माता पिता को भी लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ये प्रक्रिया माता पिता के धैर्य की कसोटी करती है। लेकिन ये भी सच है क़ि जिस तरह किसान अच्छी फसल प्राप्त करने की प्रक्रिया से गुजरे बगैर अच्छी फसल प्राप्त कर नहीं सकता। माता पिता भी बच्चों को संस्कारी बनाने क़ि प्रक्रिया से गुजरे बगैर बच्चों को संस्कारी बना नहीं सकते।
फसल प्राप्त करने के लिए किसान पहले खेत जोतता है, फिर बीज बोता है, फिर पानी से सिंचन करता है। बीजों के अंकुरित होने से लेकर कटाई तक तथा जंगली जानवरों एवं शत्रु से फसल को बचाने के लिए निगरानी करता है। फसल को कोई रोग ना लगे, इसलिए कीटनाशक पदार्थों का उपयोग करता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौसम मेहरबान रहे तो अच्छी फसल तैयार होती है। पूरी प्रक्रिया में कहीं भी थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो सारी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा रहता है। इसी तरह बच्चों में संस्कारों का सिंचन करना भी पल दो पल या महीने दो महीने की प्रक्रिया नहीं। ये एक लम्बी प्रक्रिया बल्कि कहना चाहिए की एक लम्बी साधना है।
बच्चों द्वारा सिखने की प्रक्रिया गर्भावस्था से ही शुरू हो जाती है। अभिमन्यु ने चक्रव्यूह के बारे में जानकारी कब प्राप्त की थी? अगर अभिमन्यु की कथा इस बात का प्रमाण है क़ि बच्चा गर्भावस्था से ही सीखना, ज्ञान प्राप्त करना शुरू कर देता है। गर्भावस्था के दौरान माँ जो कुछ भी: सुनती हैं, सोचती हैं, समझती हैं , देखती हैं. पढ़ती हैं, खाती हैं, पीती हैं: का असर बच्चे पर पड़ता हैं। माँ अगर धार्मिक ग्रंथ पढ़ती हैं तो बच्चे में धार्मिक संस्कारों के विकसित होने क़ी सम्भावनाएं ज्यादा होती हैं. माँ वाहियात टीवी सीरियलें देखती हैं; तो कुसंस्कारों के बीज विकसित होने क़ि सम्भावनाएं ज्यादा होती हैं। बच्चे के जन्म के बाद संस्कारों के सिंचन की प्रक्रिया आगे बढाती हैं। यूँ समझिये कि वो बीज के अंकुरित होने के बाद की स्थिति होती हैं.
बच्चे कुसंस्कारों का विष पी न जाये। इसलिए टीकाकरण भी जरुरी हैं। बच्चों को ये बताते रहना जरुरी हैं कि कुसंस्कार, अनीति, जूठ,छल, प्रपंच का फल हमेशा बुरा फल मिलता हैं। जब कि सत्य, निष्ठा, ईमानदारी, सद्गुणों का फल हमेशा अच्छा मिलता हैं। बच्चों का 'टीकाकरण' करने के लिए छत्रपति शिवाजी व उन की माता माता जीजाबाई, सरदार वल्लभभाई पटेल, स्वामी विवेकानंद तथा और भी ऐतिहासिक पात्रों कि कथाएं सुनायी जानी चाहिए। इतिहास में ऐसी बहुत सी कहानियां है। जिन का 'टीकाकरण' करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। इतिहास की गाथाएं बच्चों को बताएंगी कि कठोर परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती। कठोर परिश्रम के बाद भी सफलता तब मिलती है जब माता पिता का आशीर्वाद हो। कवि ने दो ही पंक्तियों में खेती के प्रतिकों के सहारे कितना कुछ कह दिया है। वही किसान अच्छी फसल प्राप्त कर सकता है। जो अच्छी फसल प्राप्त करने कि योग्यता रखता हो। वही माता पिता बच्चों को संस्कारी बना सकते हैं। जो पहले खुद संस्कारी बनते हैं।
महेश सोनी
(गुजराती लेखक मंडल के मुखपत्र लेखक अने लेखन में कुछ वर्ष पहले छपा मेरा लेख)

मेरा परिचय

n t s o o S e p d 3 9   Shared with On मेरा नाम महेश सोनी है। गुजराती माध्यम में कक्षा 11 तक शिक्षा प्राप्त की है। जडतर ज्वैलरी का कलाकार था...