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बुधवार, जून 13

जब जब बुलाएँगे गीत तेरे

जब भी बुलायेंगे गीत तेरे
चला मैं आऊँगा मीत मेरे
कभी मैं आऊँगा बन के यादें
कभी मैं आंसु बन टपकूंगा
औ...र शबद की धारा बनके
कलम से स्याही बन के बहूंगा...जब

गंगा जमना बनके प्यारे
संगम में न मिल सके तो
बन के सावन भादो सजनी
बादल में हम बस जाएँगे
जीवन पथ पे चल के प्यारे
इक दूजे के हो न सके तो
बन के खुशबू फूलों की हम
फूलों में ही बस जाएँगे...जब

चहकेगी जब यादों की कोयल
सूर लहराएँगे जैसे पायल
इक इक घुंघरूं ये कहेगा
पूछो ना ये क्युं हैं घायल
बरसेगी घनघोर घटायें
रोयेगी शिव की जटायें
रो रो के वो ये कहेगी
पूछो ना क्युं रोये कोयल...जब
कुमार अहमदाबादी 

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