Translate

शुक्रवार, जून 28

बेटी री



[राजस्थानी रचना]
जात ने तू क्यों मिटावे बेटी री
कोख ने क्यों चिता बणावे बेटी री

बेटी लछमी बेटी सरसूती है तोइ
क्यों भलाई तू न चावे बेटी री

भार कऴी पर नोखे क्यों बेसुंबार
जोन जल्दी क्यों जिमावे बेटी री

बेटे बेटी ने बराबर मोने तो
मरजी री शादी कराये बेटी री

भोऴे ने अरदास कर तूं रोज आ
चूंदडी ना कोई लजावे बेटी री
कुमार अहमदाबादी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आज तेरा व मेरा दुलारा गया (ग़ज़ल)

 आज तेरा व मेरा दुलारा गया जेब से माल सारा का सारा गया जून के गर्म मौसम में था हाल ये “रात काटी गयी दिन गुजारा गया” प्रेम का दौर एसे बिताया ...