Translate

शुक्रवार, अप्रैल 21

झुकी आंखें ( मुक्तक)


 झुकी आंखें नजर भी है झुकी तेरी
न जाने कब से सांसे हैं रुठी तेरी
नहीं मानी कहा था प्यार मत कर तू
रहेगी अब सदा आंखें भीगी तेरी
कुमार अहमदाबादी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आज तेरा व मेरा दुलारा गया (ग़ज़ल)

 आज तेरा व मेरा दुलारा गया जेब से माल सारा का सारा गया जून के गर्म मौसम में था हाल ये “रात काटी गयी दिन गुजारा गया” प्रेम का दौर एसे बिताया ...