साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
Translate
शुक्रवार, अप्रैल 21
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
लाल दुपट्टा मलमल का
ये गीत क्या करते थे साजना तुम हम से दूर रहकर १९८९ में बनी लाल दुपट्टा मलमल का मूवी का है। ये गीत तब भी सुपर हीट था व आज भी सुपर हीट ...
-
स्तब्ध भाव स्तब्ध हो गये शब्द मौन हो गये पीर छलकी नदी सी बाँध गौण हो गये कुमार अहमदाबादी
-
आग से यूँ न खेलो सनम हाथ अपना जला लोगे। ईश्क का ईम्तहाँ लेने में प्यार अपना गंवा दोगे॥ हमसफर साथ हो तो कटेगा सफर कामयाबी से। लक्ष्य पाने स...
-
मैं जब लगभग चौदह वर्ष का था यानि टीन एज(किशोरावस्था) में प्रवेश कर चुका था। उन दिनों अहमदाबाद के पहले डबल डेकर(आज की भाषा में मल्टीप्लेक्स ...
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें