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बुधवार, मई 3

सबकुछ है गुलाबी(मुक्तक)



 होंठ बिंदी फूल सबकुछ है गुलाबी 
ये अलकलट और चुनरी है नवाबी 
रोकता हूं मैं कलम को बारहा पर
देखकर यौवन हो जाती है शराबी 
कुमार अहमदाबादी

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