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गुरुवार, अगस्त 31

आयो भादवो(बाबे रो भजन)

 

आयो भादवो भले रो, मनडे रो मोर नाचे

बाबा रे पाळा चालो, बाबो थांरी डोर खेंची

आयो भादवो......


1

वीर है कळयुग में साचा, देवे है पग पग पर परचा

नाम बाबे रो ले टुर जा, करो बाबे री सब चर्चा

 ओ तो धाम रुणिचे वाला, मनडे री पोथी बाचे

आयो भादवो......


2

आ दुनिया बाबे ने पूजे, जयकारो जोरों सूं गूंजे

ध्वजा रो  दरसन करता ही, भाव अंतर मन भीजे

थारो दुखडो बे सुणेला, मनडे ने क्यों भींचे

आयो भादवो ......


3

करोड़ों यात्री आवे, मनसा पूर्ण हो जावे,

पाय जनमारो वे धोवे, बीज नेकी रा वे बोवे

थारी बावडी रे पाणी सूं धर्म बेल ने भींचे

आयो भादवो ......




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