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मंगलवार, अगस्त 8

कविता कैसे बनती है

मैं आप को बताता हूं. कविता की रचना एसे होती है. समझो मैं यानि एक कवि को एक फंक्शन में जाना है. जाने से पहले कवि की अपनी पत्नी से बात हुई. जिस में ये तय हुआ. मैं आप को समाज की फंक्शन में फलां फलां जगह पर मिलूंगा या मिलूंगी. कवि निर्धारित समय पर पहुंच गया. लेकिन वहां पत्नी दिख नहीं रही. कवि ने इधर उधर नजर घुमाई. नहीं दिखा. अब कवि नजर घुमा रहा है.लेकिन पत्नी दिख नहीं रही. अब चूं कि कवि है इसलिए खोजते खोजते एक कविता मन में उपजी. जो ये थी.


शाम से खोजती है नजर

वाम को खोजती है नजर

भोली रानी छुपी है कहां

जाम को खोजती है नजर

कुमार अहमदाबादी


सौंदर्य के उपासक कवि के लिए उस की पत्नी(जो वामांगी कहलाती है, क्यों हर शुभ कार्य में वो हमेशा वाम यानि लेफ्ट साइड में ही बैठती है) जाम से कम नहीं होती. 

इस छोटी से कविता में कितनी महत्वपूर्ण बातें आ गई है. मैंने कुछ नहीं किया. कवि को जब भी कहीं कोई मिलनसार व अच्छा व्यक्ति मिल जाता है. कविता बन जाती है. मुझे उम्मीद है. मेरी बात आप की समझ में आ गई होगी. 

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