तुम ध्यान धरो मानव परमात्मा का
उस से ही मिलन होगा उच्चात्मा का
ये ध्यान तुम्हें ले जाएगा भीतर
दर्शन वहीं पर होगा श्रेष्ठात्मा का
कुमार अहमदाबादी
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
ये गीत क्या करते थे साजना तुम हम से दूर रहकर १९८९ में बनी लाल दुपट्टा मलमल का मूवी का है। ये गीत तब भी सुपर हीट था व आज भी सुपर हीट ...
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