प्यारे साजन रंग दो चुनरी मोरी
अब तक है बेदाग़ व बिलकुल कोरी
ये चंचल नटखट हो गयी है बालिग़
चाहो तो कर सकते हो बरजोरी
कुमार अहमदाबादी
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
अनुदित अनुवादक -महेश सोनी वाहन चलाते समय टायर घिस जाते हैं। जब की जीवनभर दौडने के बाद भी आप के पैर के तलवे नये जैसे रहते हैं। शरीर में ७५% ...
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