साथी सब से अच्छा है ये प्याला
मैं हूं तन्हा तन्हा है ये प्याला
साथी हैं हम एसे मैं प्याले में
एवं मुझ में बसता है ये प्याला
कुमार अहमदाबादी
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
चेतना को सब पता है लालसा क्या चीज है लोभ लालच चापलूसी फायदा क्या चीज है शब्द तो मालूम था पर अर्थ से परिचित न था मौत ने उस की बताया फासला ...
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