चेतना को सब पता है लालसा क्या चीज है
लोभ लालच चापलूसी फायदा क्या चीज है
शब्द तो मालूम था पर अर्थ से परिचित न था
मौत ने उस की बताया फासला क्या चीज है
ज़िंदगी में तुम चले हो मखमली पथ पर सदा
“किस तरह समझाऊं तुम को हादसा क्या चीज है”
याद आता है मुझे वो दौर स्वर्णिम सेठ जब
जानते थे शिल्प सी कुंदन कला क्या चीज है
जानते हैं ना कभी भी जान पाएंगे पुरुष
औरतें ही जानती है मायका क्या चीज है
पीर तेरी मैं समझ सकता हूं प्यारे क्योंकि ये
ये व्यथित दिल जानता है जलजला क्या चीज है
चाव से श्रम से लगन से जोड़कर तिनके “कुमार”
खग युगल ने ये बताया हौसला क्या चीज है
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