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शनिवार, जनवरी 31

छाछ मांगने में लोटा खोया

 हिन्दी में एक कहावत छाछ मांगने गयी थी लेकिन लोटा खोकर आयी है


सब को नहीं मालूम की तजाकिस्तान में भारत का एयरबेस(हवाई थाना) है। भारत उस के लिये काफी बडी रकम चुकाता है। 


मगर अब तजाकिस्तान में वो एयरबेस नहीं है। 

पाकिस्तान उस एयरबेस से बहुत परेशान रहता था। भारत के लडाकू फाइटर हवाई जहाज लगातार उस के सिर पर सवार से रहते थे।

पाकिस्तान ने तजाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिये तुर्की और कतर का संपर्क किया। उन के कहा वे भारत के एयरबेस बंद करवाये। 

तजाकिस्तान ने उन के पर भारत पर दबाव बनाया। 


पाकिस्तान खुश था क्यों कि अब लहंगा फाड़ना बाकी रहा था। 


जैसे ही तालिबान को इस मामले का पता चला। उन्होंने अपना बगराम एयरबेस भारत को देने का प्रस्ताव रखा। भारत ने प्रस्ताव पर तुरंत स्वीकृति की मोहर लगा दी। यहां पाकिस्तान के लिये वो कहावत *लेने गयी पूत खो आई खसम* (बेटा पैदा करने के चक्कर में पति को खो दिया) सटीक बैठती है। अब भारत तजाकिस्तान के एयर बेज से सारे साजो सामान बगराम में ले जा रहा है।  

"बानरा" ने स्वयं बगराम एयरबेस पर कब्जा करने का प्रयास किया होने के कारण उसे मालूम था। पाकिस्तानी सुअरों ने उस में दखल दी है। उन को फंसाकर अपना खेल बिगाड़ने के बाद उसने इन सुअरों को फिर से FATF की ग्रे सूचि में डाल दिया है; और अब वो विश्व बैंक द्वारा मिलने वाली लोन की किस्त भी को भी अटका देगा। 


इस सब के दरमियान भारत के जो लडाकू जहाज तजाकिस्तान से हट गये थे। वे अब बगराम में जैसे एकदम उन की छाती पर तैनात है।


एक दूसरी बात: "एसे समाचार हैं कि बगराम के बदले में भारत अफगानिस्तान सात एसे नोन रिफंडेबल प्रोजेक्ट में धन की आपूर्ति करेगा। एसा सुनने में आया है कि उन प्रोजेक्ट्स में एक प्रोजेक्ट एक एसी नदी उश पर बांध बांधने का है। जिस का लगभग पूरा पानी बहकर पाकिस्तान में जाता है। 


अब मुझे बताइये मुनीर और शाहबाज का लहंगा फटा है या नहीं फटा? 🤷🏻‍♂️

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