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गुरुवार, अप्रैल 9

परमात्मा का आभार मानने के लिये दस अदभुत कारण


अनुदित

अनुवादक -महेश सोनी 


वाहन चलाते समय टायर घिस जाते हैं। जब की जीवनभर दौडने के बाद भी आप के पैर के तलवे नये जैसे रहते हैं।

शरीर में ७५% पानी होता है। लाखों छिद्र होने के बावजूद एक बूंद पानी शरीर में से लीक नहीं होता है।

सहारे के बिना कुछ भी टिकता नहीं, स्थिर नहीं रहता। लेकिन शरीर अपना संतुलन बनाकर रखता है।

बैटरी कोई भी हो चार्ज किए बिना चलती या टिकती नही है। जब की हृदय जन्म से मृत्यु तक लगातार धडकता रहता है।

कोई भी पंप हमेशा नहीं चलता। लेकिन रक्त पूरी जिंदगी लगातार बहता रहता है।

विश्व के बढ़िया से बढ़िया कैमरों की भी मर्यादा होती है। लेकिन आंख हजारों मेगा पिक्सल के प्रत्येक दृश्य को देख सकती है। उस का विश्लेषण कर सकती है। 

कोई भी लेबोरेट्री स्वाद का परीक्षण नहीं कर सकती। जीभ किसी भी साधन के बिना अनेकों स्वाद को पहचान लेती है।

सब से आधुनिक सेन्सर भी मर्यादित है। त्वचा सूक्ष्म से सूक्ष्म संवेदना का अनुभव कर सकती है।

कोई भी साधन प्रत्येक आवाज को उत्पन्न नहीं कर सकता। लेकिन गला हजारों फ्रीक्वेंसी के आवाज उत्पन्न कर सकता है।

कोई भी उपकरण आवाजों को पूर्ण रुप से डिकोड नही कर सकता। लेकिन कान प्रत्येक आवाज को समझते हैं; और अर्थ घटन भी करते हैं।

*ईश्वर ने हमें जो जो अनमोल सुविधाएं दी है। उस के लिये उस का आभार मानिये।*

और

*हमें कोई अधिकार नहीं है हम परमात्मा को शिकायत करें।*


*रोज सुबह उठना अपने आप में एक चमत्कार है!*



*इन सब के लिये सर्वशक्तिमान परमात्मा को धन्यवाद कहो*


🙏🏻

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