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मंगलवार, फ़रवरी 15

काला रंग और मनोविज्ञान

मनोविज्ञान रंग और उस के प्रभाव को जानता है; जानता है इसलिये बताता भी है। मनोविज्ञान कहता है प्रत्येक कुदरती रंग मानव के मस्तिष्क तक एक भाव, अर्थ एवं प्रभाव पहुंचाता है। वो प्रभाव मानव को दुनिया को घटनाओं को समझने में मदद करता है। 

मैं पहले भी एक दो पोस्ट में कुछ रंगों के प्रभाव व उस के असर की बात लिख चुका हूँ। जैसे कि लाल रंग उग्रता, हरा रंग समृद्धि का, केसरिया रंग वीरता का, सफेद रंग शांति का, आसमानी रंग गहराई एवं विशालता का, पीला रंग कमजोरी का प्रतिक है। 

आज बात करते हैं काले रंग की,

काला रंग अंधेरे का प्रतिक है। रात काली होती है। जो रात जितनी ज्यादा काली होती है। उतनी ही रहस्यमयी, भेदभरमवाली व विकराल होती है या लगती है। काले रंग का नकारात्मक शक्तियों से बहुत गहरा घनिष्ठ लगाव है। आप ने कयी किस्से कहानियों में पढा होगा। तांत्रिक अक्सर अमावस की गहरी काली रात को श्मशान में साधना करते हैं। आपने शायद इस पर भी गौर किया होगा। वे जब अपनी साधना आराधना पूजा या अपनी विधियां करते हैं: तब ज्यादातर तांत्रिक काले रंग के वस्त्र धारण कर के उपरोक्त सारी विधियां करते हैं। 

एसा नहीं है कि काला रंग सिर्फ नकारात्मक या विध्वंसकता का ही प्रतीक है। कयी अन्य सकारात्मक कार्य भी काले रंग के प्रभाव के दौरान यानि जब अंधकार छाया हो; तब किये जाते हैं। जैसे की यौन कार्य एकांत में किये जाते हैं; और उस से महत्वपूर्ण सृजनात्मकत कार्य दूसरा कोई नहीं है। लेकिन एसे सकारात्मक कार्य बहुत कम हैं। जो काले रंग के प्रभाव यानि अंधकार में किये जाते हों। 

आपने ये भी गौर किया होगा। चोर जब चोरी करने जाता है। तब अक्सर काले रंग के वस्त्र पहनकर या चेहरे पर काला नकाब बांधकर जाता है। 

कयी पुरानी कहानियों में समुद्री लुटेरों को या डाकूओं को भी काला नकाब पहने हुये बताया गया है। इसी तरह कई बार व्यक्ति चोर न होते हुये भी काला नकाब पहनते हैं। काला लबादा ओढते हैं। 

लेकिन आजकल इस काले नकाब का दुरुपयोग भी होने लगा है। कुछ शरारती लोग जो स्वभाव से विभाजनकारी हैं; कानून व्यवस्था को तोडने में अपनी शान समझते हैं। वे नकाब का दुरुपयोग करने लगे हैं। 

वीर वो होता है। जो हमेशा खुली लडाई लडता है। दूसरी तरफ कायर कभी खुली लडाई नहीं लडता। जो अपने हक के लिये लडता है और जिसे अपनी लड़ाई सच्ची होने का विश्वास होता है। वो कभी मुंह छुपाकर नहीं लडता। मुंह छुपाकर वो लडता है। जिस की नियत में खोट होती है। 

जो अपना मुंह छुपाना चाहता है। उस की नियत में कहीं न कहीं गलत इरादे छुपे होते हैं। जिस के इरादे गलत नहीं होते। वो कभी भी मुंह नहीं छुपाता; तथा किसी भी तरीके से अपनी पहचान नहीं छुपाता। 

महेश सोनी

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