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रविवार, फ़रवरी 8

रूप को छेड़ना मत (मुक्तक)


अनुदित 


मूर्ख मन रूप को छेड़ना मत कभी 

 ज्योत है शांत है फिर भी वो आग है

भस्म कर देगी ज्वाला बनी वो अगर 

उस के मन में धधकता अनुराग है

कुमार अहमदाबादी

 

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