आज तेरा व मेरा दुलारा गया
जेब से माल सारा का सारा गया
जून के गर्म मौसम में था हाल ये
“रात काटी गयी दिन गुजारा गया”
प्रेम का दौर यूं भी बिताया है जब
"रात काटी गयी दिन गुजारा गया”
मुस्कुराकर श्रमिक ने कहा दोस्त से
बाढ़ में सेठ का माल सारा गया
एक पीएम की मौत पर ये लगा
टूटकर आसमां से सितारा गया
दार्शनिक ने कहा सेहरा देखकर
एक मासूम बेमौत मारा गया
स्कूल की क्लास में फूल की आंख से
फूल की आंख तक गुप्त इशारा गया
भूलना है कठिन उस घडी को “कुमार”
चांद को जाम में जब उतारा गया
ये बताओ गया क्या तुम्हारा “कुमार”
प्यार में जो गया वो हमारा गया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें