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बुधवार, फ़रवरी 25

आयु का खेल


आयु का खेल

अनुवादक - महेश सोनी 


*“1 ₹ के 6 गोलगप्पे”* से *“30 ₹ के 6 गोलगप्पे होने तक हम बड़े हो गये। 

*“मैदान में आजा”*

और 



*“ऑनलाईन आजा”*

के बीच 

हम बडे हुए हैं।

        

*“होटल में खाने की इच्छा”*

एवं 

*“घर में खाने की इच्छा”*

के बीच हम बड़े हो गये।


*“बहन की पारले की चॉकलेट चुराने”*


और

*“बहन के लिये सिल्क लाने तक”*

हम बडे हो गये।

  

*“मम्मी, बस पांच मिनिट और सोने दे”*    

और

*“snooze बटन दबाने के बीच हम सब बडे हो गये। ये हमें मालूम ही नहीं हुआ।

 


*“टूटी हुई पेन्सिल”*


       

*“टूटे हुए मन”* के बीच हम बड़े हो गये।


*“मैं बडा होना चाहता हूं।”* 

और 

             

*“मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूं"* 

के बीच हम बडे गये।


*“चलिये, मिलकर आयोजन करें”*

से

*“चलिये मिलकर कुछ आयोजन करते हैं”*

इन दो OK के बीच हम बडे हो गये।

   

आखिर में           

*“किसी की तोंद निकल आयी है तो किसी के बाल झड़ गये हैं"*


*“आयु के हमारे साथ खेल कर गयी”*... 



*सब के* 

*क्या सपने थे* 

*और सब क्या बन गये हैं....*

*परिस्थिति अनुसार* 

*सब ने अपने अपने रास्ते चुन लिये हैं..!* 

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आयु का खेल

आयु का खेल अनुवादक - महेश सोनी  *“1 ₹ के 6 गोलगप्पे”* से *“30 ₹ के 6 गोलगप्पे होने तक हम बड़े हो गये।  *“मैदान में आजा”* और  *“ऑनलाईन आजा”* ...