आयु का खेल
अनुवादक - महेश सोनी
*“1 ₹ के 6 गोलगप्पे”* से *“30 ₹ के 6 गोलगप्पे होने तक हम बड़े हो गये।
*“मैदान में आजा”*
और
*“ऑनलाईन आजा”*
के बीच
हम बडे हुए हैं।
*“होटल में खाने की इच्छा”*
एवं
*“घर में खाने की इच्छा”*
के बीच हम बड़े हो गये।
*“बहन की पारले की चॉकलेट चुराने”*
और
*“बहन के लिये सिल्क लाने तक”*
हम बडे हो गये।
*“मम्मी, बस पांच मिनिट और सोने दे”*
और
*“snooze बटन दबाने के बीच हम सब बडे हो गये। ये हमें मालूम ही नहीं हुआ।
*“टूटी हुई पेन्सिल”*
*“टूटे हुए मन”* के बीच हम बड़े हो गये।
*“मैं बडा होना चाहता हूं।”*
और
*“मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूं"*
के बीच हम बडे गये।
*“चलिये, मिलकर आयोजन करें”*
से
*“चलिये मिलकर कुछ आयोजन करते हैं”*
इन दो OK के बीच हम बडे हो गये।
आखिर में
*“किसी की तोंद निकल आयी है तो किसी के बाल झड़ गये हैं"*
*“आयु के हमारे साथ खेल कर गयी”*...
*सब के*
*क्या सपने थे*
*और सब क्या बन गये हैं....*
*परिस्थिति अनुसार*
*सब ने अपने अपने रास्ते चुन लिये हैं..!*
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