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शुक्रवार, मार्च 13

प्रधानमंत्री को खुला पत्र(अनुदित)

प्रधानमंत्री को खुला पत्र..

अनुवादक - महेश सोनी 


ये संदेश हिन्दूजा अस्पताल के भूतपूर्व सीईओ श्री प्रमोद लेले का है। 



 आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,

हम इतने लायक नहीं है। जिन्हें आप जैसे कुशल प्रधानमंत्री मिलें।

देश के ज्यादातर लोग आप के कार्यों की प्रशंसा करते नहीं है।


आप दिन में सोलह घंटे काम करते हैं।

आप रात्रि को उडान भरकर दिन में दूसरे देशों की मुलाकात लेकर समय बचाते हैं। …

किन्तु ये कायर और मानसिक रुप से अस्वस्थ लोग आप के बलिदान की कदर कभी नहीं करेंगे।


एक परिवार को साठ(60) वर्षों के लिये सौंपनेवाले लोग आप को पांच वर्ष तक शांति से शासन करने नहीं देंगे।


ये देश झूठे देशभक्त, झूठी ख्याति और आलसी मनोवृत्ति रखनेवाले लोगों का है।

एसे लोग अपेक्षा रखते हैं। ये देश मुझे सबकुछ देगा। 

मगर मैं देश के लिये कुछ नहीं करुंगा।


-मुझे चौबीस घंटे पानी चाहिये; लेकिन मैं एक भी वृक्ष नहीं लगाउंगा।


मझे की बात ये कि वे आप से आशा करेंगे। आप वृक्ष लगाएं। 


वे अपने चार व्यक्तियों के परिवार को सही तरह से संभाल नहीं पा रहे हैं, सही तरीके से घर नहीं चला सकते। लेकिन आप को सलाह देंगे। देश को सही तरीके से कैसे चलाया जाता है।

है ना मजे की बात…..!


ये कोई भूत नहीं, मगर एक भूत आप से बदला लेना चाहता है।

आपने जैसे प्रधानमंत्री बनकर विश्व का सब से बडा अपराध किया है।


वे वापस घर लौटना नहीं चाहते एवं धर्म परिवर्तन को प्रतिबंधित करनेवाला कानून भी नहीं चाहते।


दादरी की घटना में भीड जुट गयी। परंतु देश के लिये बलिदान देने वाले संतोष महाडिक के पीस कोई नहीं आया।


जब गौहत्या कानूनन प्रतिबंधित होती है; तब खुल्लम खुल्ला बीफ पार्टियों का आयोजन होता है। ये वो लोग है जो अहिंसा का विरोध करते हैं। 


आतंकवादी को फांसी देने का विरोध करनेवाले देशद्रोही कन्हैया को समर्थन दिया जाता है।

वे आप का नाम लेकर आप का अपमान करते हैं।

वे असहिष्णुता के बहाने से पुरस्कार वापस करते हैं।

परंतु निर्भया हत्या केस। २६/११ जैसी विस्फोटक घटनाएं होने पर मुंह पर ताले लगा लेते हैं।

जो लोग एसे हैं। उन का प्रतिनिधित्व करनेवाले कैसे होंगे। 

आप देश के लिये ढेर सारा काम करते हैं; मगर एसे लोग आप को देशभक्ति का पाठ पढाते हैं।



अदभुत!

-सत्य यै है की उन लोगों से ये सहन नहीं हो रहा है। आप प्रधानमंत्री बन गये हैं।

- वे अपेक्षा रखते हैं; मेरे घर के सामने पडा कूडा म्युनिसिपल कोर्पोरेशन मेरे फोन किये बिना अपने आप ले जाएगा।

- उन की बमबारी के कारण पूरा देश विनाश की ओर आगे बढ़ रहा है।

- उन को ये हकीकत हजम नहीं हो रही है। देश मजबूत हो रहा है। देश प्रगति कर रहा है...🇮🇳


मगर नहीं……

वे अरहर दाल १₹ प्रति किलो और प्याज मुफ्त का चाहते हैं।

आप भ्रष्टाचार खत्म कीजिये। एसे लोग सकारात्मक परिवर्तन चाहते ही नहीं है।

मुफ्त का खाने का चस्का जो लग गया है। 

हमारा इतिहास साक्षी है…

कोई भी व्यक्ति स्वयं नहीं बदलेगा। मगर ये अवश्य चाहेगा। देश बदलना चाहिये।


५०००० ₹ के स्मार्टफोन का उपयोग करेंगे।


३जी, ४जी, ५ज४ के पैकेज का उपयोग करेंगे।

-लेकिन कहेंगे “मोदी की सरकार बेकार है। महंगाई कितनी बढ़ गयी है”


-२९९₹ का ३जी पैकेज आवश्यक है। अरहर दाल और प्याज मुफ्त में चाहिये।

-जो रास्ते में कहीं भी थुकते हैंं; जल का नल खुला छोड देते हैं। कहीं खुला नल दिखे तो बंध नहीं करते। चौराहे पर ट्राफिक सिग्नलों की अनदेखी करते हैं। वे पूछते हैं, अच्छे दिन कब आएंगे?



●●● *साहब* हमारे लोग एसे ही हैं।●●●


● आप विश्व के १० विख्यात और प्रतिभाशाली व्यक्तियों में से एक हो। लेकिन उन को इस से कोई मतलब नहीं है।


● आयु के इस पडाव पर आप को आराम करना चाहिए। लेकिन आप सोलह(१६) घंटे कार्य करते हैं। नौजवानों को काम करना चाहिए।‌ लेकिन वे आराम करते हुए देश बदलने की कल्पना करते हैं।



● आप के काम का आप के बलिदान का यहां कोई मूल्य नहीं है।

आप का व्यक्तित्व एसा है। आप विश्व का नेतृत्व करेंगे।


●मगर इस देश के लोग उस का मूल्यांकन नहीं करेंगे।

मोदी जी, आप के लिये मेरे मन में अंदर था है व रहेगा..🚩



● कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगेगा। 

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।


समय बताएगा कौन वैचारिक गरीब व 

कौन अमीर था।

दुर्भाग्यवश आधे या उस से ज्यादा लोग इसे फॉरवर्ड भी नहीं करेंगे 😔




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