अनुवादक - महेश सोनी
✳️ समय पुराना था ✳️
लोगों के पास तन ढकने के लिये वस्त्र नहीं थे; लेकिन वे तन ढकने का प्रयास करते थे।
आज वस्त्रों के भंडार भरे पडे हैं लेकिन तन का प्रदर्शन करने के प्रयास करते हैं।
समाज बहुत “सभ्य” हो गया है, है ना!
✳️ समय पुराना था ✳️
आवागमन के साधन मर्यादित थे; लेकिन लोग रिश्तेदारों से मिलने जाते थे।
आज बेशुमार साधन है लेकिन लोग न मिलने के लिये बहाने बनाते हैं।
समाज बहुत सभ्य” हो गया है, है ना!
✳️ समय पुराना था ✳️
एक घर की बेटी को पूरा गांव अपनी बेटी मानता था।
आज बेटी पड़ोसी के घर जाए तो भी मन डरता है।
समाज बहुत “सभ्य” हो गया है, है ना!
✳️ समय पुराना था ✳️
लोग अपने इलाके के बुजुर्गों को हालचाल पूछ लेते थे।
आज लोग स्वयं अपने माता पिता को ही वृद्धाश्रम में भेज देते हैं।
समाज बहुत सभ्य हो गया है, है ना!
✳️ समय पुराना था ✳️
खिलौने सीमीत मात्रा में थे। इलाके के बच्चे साथ मिल जुलकर खेलते थे। आज बच्चे मोबाइल में कैद हो गये हैं।
समाज बहुत “सभ्य” हो गया है, है ना!
✳️ समय पुराना था ✳️
गली के पशुओं को भी रोटी दी जाती थी। गाय और कुत्ते के लिये घर में दो रोटी हमेशा बनती थी।
आज पड़ोसी के बच्चे भूखे सो जाते हैं।
तब मानवता रोने लगती है।
समाज बहुत सभ्य हो गया है।
✳️ समय पुराना था ✳️
लोग पड़ोसी के घर आये मेहमान का हालचाल पूछते थे।
आज पड़ोसी का नाम तक नहीं जानते।
समाज बहुत सभ्य हो गया है
👌 वाह रे आधुनिक और सभ्य समाज👌
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