वीर तौलेंगे गगन को
स्वप्न चूमेंगे गगन को
हौसला ये जानता है
पंख छू लेंगे गगन को
कुमार अहमदाबादी
स्वप्न चूमेंगे गगन को
हौसला ये जानता है
पंख छू लेंगे गगन को
कुमार अहमदाबादी
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
कुमार अहमदाबादी प्रस्तुत एक घटना छोटे से नगर की गळी की है; जो की अंदाजन १८० से २०० वर्ष पुरानी है। नगर में एक गळी थी। उस गळी के अंदर भी ए...
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