साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है।
इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
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मंगलवार, अक्टूबर 29
जगमग (मुक्तक)
आशा ने जब दीप जलाया लौ ने जलवा खूब दिखाया कोना कोना रोशन कर के जगमग ने कर्तव्य निभाया कुमार अहमदाबादी
bahut khoob
जवाब देंहटाएंShukriyaa Jyoti sinh Ji
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