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शुक्रवार, दिसंबर 19

सब पीते हैं कहती है(रुबाई)


 सब पीते हैं कहती है मधुशाला 

सारे होते हैं तृप्त पीकर प्याला

हां, होता है समय अलग मक़सद भी

करती है शांत हर अगन को हाला

कुमार अहमदाबादी 



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