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शनिवार, दिसंबर 27

मुस्कुरा रही है कब से (रुबाई)


 मन ही मन मुस्कुरा रही है कब से 
आंखें भी पट पटा रही है कब से 
मौसम का है नशा या है यौवन का
मछली सी छटपटा रही है कब से 
कुमार अहमदाबादी 

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