अनुवादक – महेश सोनी
१.विवाह के समय सब व्यस्त होते हैं। बेटी की मनःस्थिति के बारे में किसी को मालूम नहीं होता।
३.आमंत्रण पत्रिका में अपने नाम के बाद ब्रेकेट में लिखे नाम को देखकर सोचती है। आज आखिरी बार मेरे नाम से बाद पिता का नाम लिखा गया है। आज के बाद न सिर्फ नाम बल्कि पहचान व वातावरण आदि सब \ बदल जाएंगे।
३.कल तक जो जिद कर के भी अपनी बात मनवाती थी। आज वो इच्छाओं को नियंत्रित करना सीख जाती है।
४.बेटी किसी से कुछ भी कहना नहीं चाहती। ससुराल से पीहर आने पर अपने पुराने गिलास में पहले मटकी में से पानी लेकर पीती है। उसे घर के किसी कोने में अपना बचपन मिल जाता है। वो आज भी पापा की उंगली पकड़कर घूमना चाहती है। झूले में बैठ कर झूला झूलते हुए साउंट सिस्टम पर उंची आवाज में मनपसंद गीत सुनना चाहती है। लेकिन, अब वो बेटी होने के साथ साथ किसी की पत्नी भी है। कर तक जो जिद कर के भी अपनी अपनी इच्छाएं पूरी करवाती थी। वो इच्छाओं को नियंत्रित कर लेती है। वो अब किसी को कुछ कहना नहीं चाहती।
५. आंसूओ को लीटर या किसी और तरह से नहीं मापा जा सकता है। नन्हीं नन्हीं हथेलियों से पापा को मनाकर फरमाइश करने के दिन गुजरे कल की बात हो जाती है। जितना कठिन बेटी के लिये अपने ही घर में मेहमान बनकर आना होता है। उतना ही कठिन पिता के लिये बेटी को मेहमान के रुप में देखना होता है।
६.बेटा चाहे कितना भी थककर घर आया हो; वो चाहे जितना बड़ा हो जाए पिता ये सोचकर की वो कर फिर से सो जाएगा; आधी रात को भी उसे जगा कर कोई काम सौंप सकता है। लेकिन अगर बेटी सोई होगी तो पिता उसे जगाने की हिम्मत नहीं करता। बेटे की शादी करते समय बाप पुनः जवान हो जाता है। जब की बेटी की शादी के बाद वो उम्र से ज्यादा बूढा हो जाता है।
बेटी की शादी मतलब नदी को नववधू बनाने के पल…!
(फेसबुक मित्र सिम्मी शाह के पटल पर पढा था। स्मृतियों से भंडार में सहेज कर रखा था। आज सामने आया तो अनुवाद कर के पेश कर दिया।)
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