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मंगलवार, जनवरी 20

कोमल है प्यारी है (रुबाई)


 ये भोली कोमल और संस्कारी है
रिश्तेदारों को मन से प्यारी है 
जल सी चंचल सागर सी गहरी औ'
गंगा सी पावन ये सन्नारी है
कुमार अहमदाबादी 

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स्वयं को तुम बदलना सीख लो (मुक्तक)

स्वयं को तुम बदलना सीख लो नये ढांचो में ढलना सीख लो यही सब से बड़ा गुण है “कुमार” समय के साथ चलना सीख लो कुमार अहमदाबादी