Translate

रविवार, जुलाई 23

इक दीवानी थी(रुबाई)


 इक दीवानी थी इक दीवाना था

मीठा प्यारा कोमल अफसाना था

दोनों की अपनी ही थी इक दुनिया

दोनों का उस में आना जाना था

कुमार अहमदाबादी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

बब्बर शेर(अनुदित)

  अनुवादक - महेश सोनी  दो नवयुवतियां सूर्योदय के समय मस्तक पर घडे रखकर जंगल की पगदंडी पर चली जा रही थी। कैसा अनुपम सौंदर्य…. पतली पतली उंगलि...