आज जासी काल आसी
काल नूंवो साल आसी
बात समझो घाव लाग्यों
खून सब रे लाल आसी
सुण दीवानी आज थारे
होठ कन्ने गाल आसी
प्रेम सूं हेलो करियों
धोती पे'रर लाल आसी
तीर जद जद तूं चलासी
तीर सामे ढाल आसी
कुमार अहमदाबादी
साहित्य की अपनी एक अलग दुनिया होती है। जहां जीवन की खट्टी मीठी तीखी फीकी सारी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर पेश किया जाता है। भावनाओं को सुंदर मनमोहक मन लुभावन शब्दों में पिरोकर पेश करने के लिये लेखक के पास कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। दूसरी तरफ रचना पढ़कर उस का रसास्वादन करने के लिये पाठक के पास भी कल्पना शक्ति होनी जरुरी है। इसीलिये मैंने ब्लॉग का नाम कल्पना लोक रखा है।
🙏 पर्यावरण दिवस पर प्रतिज्ञा🙏 अनुवादक - महेश सोनी मैं प्रतिज्ञाबद्ध रहूंगा, हमारे लिये एवं हम सब की भावि पीढीयों के लिये… मैं दंतमंजन ए...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें