स्वागत

मेरे 'स्वप्न-लोक' में आप का हार्दिक स्वागत है। मेरी इस दुनिया में आप को देशप्रेम, गम, ख़ुशी, हास्य, शृंगार, वीररस, आंसु, आक्रोश आदि सब कुछ मिलेगा। हाँ, नहीं मिलेगा तो एक सिर्फ तनाव नहीं मिलेगा। जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। किस्मत मुज पर बहुत मेहरबान रही है। एसी कोई भावना नहीं जिस से किस्मत ने मुझे मिलाया नहीं। उन्हीं भावनाओं को मैंने शब्दों की माला में पिरोकर यहाँ पेश किया है। मुझे आशा है की मेरे शब्दों द्वारा मैं आप का न सिर्फ मनोरंजन कर सकूँगा बल्कि कुछ पलों के लिए 'कल्पना-लोक' में ले जाऊंगा। आइये आप और मैं साथ साथ चलते हैं शब्दों के फूलों से सजी कल्पनाओं की रंगीन दुनिया में....

सोमवार, अप्रैल 30

दो राहा

गहन समस्या सामने है कोई हम को राह बताए
चक्र चलाएँ भूखे रहें हम कोई सच्ची राह बताए

घातक हमले संस्कृति पर
घातक हमले भारत पर
घातक हमले मानवता पर
घातक हमले आजादी पर, हो रहे हैं....कोई सच्ची

नजर के सामने मोहन हैँ दो
नजर के सामने विचार हैँ दो
नजर के सामने युद्ध हैँ दो
नजर के सामने युग पूरे हैँ दो......गहन समस्या

जीया एक पल पल में तो सिद्धांतो में दूजा जीया
कीये एक ने पाप माफ़ सौ ना माना तो चक्र
चलाया
दूजे ने गाल दूजा थप्पड के लिए आगे बढाया
नाम दोनों के समान पर लीला दोनों की जुदा थी.....गहन समस्या

दुश्मन को माफ़ कर के एक ने सारा हिसाब रखा
दूजे की माफी का बर्तन एसा जैसे अक्षय पातर
दिए एक ने अवसर शत्रु को पर मर्यादा में दिए
दूजा अवसर शत्रु को बेहिसाब बस देता रहा.....गहन समस्या

मोहन ने शस्त्र ऊठाए धर्म की खातिर सोगंध तोडी
लाठी गोली गाँधीने चुपचाप सीने मे झेले
एक ने युद्धभूमि को भी जीवन का हिस्सा माना
दूजे ने अहिंसा को शत्रु विजय का मार्ग
समझा....गहन समस्या

मूल कवि > अभण एहमदाबादी-निकेता व्यास
अनुवादक > कुमार एहमदाबादी

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