अनुवादक - कुमार अहमदाबादी
ओछुं पात्र ने अदकुं भण्यो, वढकणी वहु ए दीकरो जण्यो
मारकणो सांढ चोमासुं माल्यो, करडकणो कूतरो हडकवा हाल्यो
मरकट ने वळी मदिरा पीवे, अखा एथी सौ कोई बीवे
अखो
ओछुं भण्यो यानि अल्प योग्यता वाला इंसान एवं अधूरा ज्ञान रखने वाला इंसान समाज के लिये उतना ही हानिकारक होता है। जितना हानिकारक झगड़ालू बहु का पुत्र परिवार के लिये होता है। जिस तरह एक हिंसक बैल बरसात के मौसम में खुला छोड़ दें तो वो विनाशकारी साबित होता है। जिस तरह कुत्ता पागल होने पर किसी को भी काट सकने के कारण सब उस से बच के रहते हैं। उसी तरह पागल सनकी इंसान के हर व्यक्ति बच के रहता है; उस से दूर ही रहता है। पागल सनकी इंसान की सनक जितनी ज्यादा होती है। वो उतना ही खतरनाक होता है। बंदर वैसे भी बहुत चंचल व शरारती होते हैं। कई बार यूं ही उल्टी सीधी शरारतें करते हैं। एसे में अगर कोई बंदर मदिरा पी ले; फिर तो कहना ही क्या! फिर तो वो जितना तूफान मचाए वो कम होता है। इंसान को वो खानपान कतई नहीं करना चाहिए। जो इस के भीतर की विध्वंसक शक्तियों को जागृत कर दे। कम योग्यता या बिना योग्यता वाले इंसान के पास शक्तियों का होना। समाज के लिये हमेशा घातक साबित होता है। शक्तियां सकारात्मक इंसान के पास हो तो समाज व इंसान के प्रगति का और नकारात्मक इंसान के पास हो तो अधोगति का निमित्त बनती है।
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